logo

10 से ज्यादा दलित नेशनल प्लेयर्स का टूटा आशियाना, खुले आसमान के नीचे रहने को मजबूर

10 से ज्यादा दलित नेशनल प्लेयर्स का टूटा आशियाना, खुले आसमान के नीचे रहने को मजबूर

सन्नी शारद/रांची:

राजधानी रांची में 10 से अधिक राष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ी खुले आसमान के नीचे रहने को मजबूर हैं। कारण है कि पिछले दिनों अतिक्रमण के नाम पर सैकड़ों घरों पर बुलडोजर चलाया गया। इनमें राष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ी भी शामिल हैं। कोई खो-खो का खिलाड़ी है तो कोई मलखंभ का । घर टूटने के बाद सभी मेडल और सर्टिफिकेट लेकर प्लास्टिक की छत के नीचे रहने को मजबूर हैं।

खिलाड़ियों का कहना है कि उन्होंने कई राज्यों में जाकर झारखंड के लिए मेडल जीते और प्रदेश का नाम रोशन किया, लेकिन उसके बदले उन्हें ही बेघर कर दिया गया।

पांच राष्ट्रीय खिलाड़ी से मिले द फॉलोअप संवाददाता
द फॉलोअप की टीम मौके पर पहुंची तो पांच राष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ी—शिवम नायक (खो-खो), राकेश नायक (मलखंभ), आयुष नायक (खो-खो), रोहन नायक (खो-खो) और अनुष्का लोहरा (खो-खो)—मिले। सभी दलित समुदाय से हैं। राकेश नायक ने बताया कि इस बस्ती के करीब 20 खिलाड़ी हैं, जो राष्ट्रीय और राज्य स्तर पर खेल चुके हैं।

शिवम नायक के पिता हैं रिक्शा चालक और मां दाई
द फॉलोअप के पत्रकार सन्नी शारद की मुलाकात नायक बस्ती में राष्ट्रीय खिलाड़ी शिवम नायक और उनके परिवार से हुई। शिवम ने अपना मेडल दिखाते हुए बताया कि उसने कई राज्यों में मेडल जीते हैं और कई जगह सम्मानित भी किया गया है, लेकिन उसके घर को तोड़ दिया गया।

शिवम के पिता राजेंद्र नायक रिक्शा चालक हैं। उन्होंने बताया कि खून-पसीने की मेहनत से यह झोपड़ी बनाई थी। वे पिछले 50 से अधिक वर्षों से यहां रह रहे थे। बिजली कनेक्शन, आधार कार्ड और वोटर कार्ड सब कुछ है, लेकिन फिर भी अवैध बताकर सभी घरों को तोड़ दिया गया।

शिवम की मां अनिता देवी ने बताया कि उनके तीन बेटे और एक बेटी हैं। वह अगल-बगल के घरों में झाड़ू-पोछा करके घर चलाती हैं। जब से घर टूटा है, तब से वह काम पर नहीं जा रही हैं।

Tags - JharkhandRanchiEncroachmentSportsman