द फॉलोअप टीम, रांचीः
जब से कोरोना वायरस आया है तब से हर किसी के मन में अब डर सा बैठ गया है कि ना जाने अब चमगादड़ को लेकर यह कौन सी बिमारी फैला दे। इसी बीच अब खबर आ रही है कि गया शहर के आसमान में ग्रेटर इंडियन फ्रूट बैट (चमगादड़ की बड़ी प्रजाति) की को देखा गया है। गांधी मैदान व इसके आसपास के इलाके में ये पाये गये हैं। इस चमगादड़ की वजन 0.6 किलो से 1.6 किलो तक की है। शोध विशेषज्ञों के मुताबिक गया में कॉमन पीपी स्ट्रीली व ग्रेटर येलो हाउस बैट की प्रजातियां पायी जाती हैं, जो 200 से 300 ग्राम के होते हैं।

कई बिमारियों को फैलाता है यह चमगादड़
यह वाकई चिंता का विषय है। यह चमगादड़ सात खतरनाक वायरस का वाहक है । यह मुख्य तौर पर निपाह वायरस, रैबिज वायरस, सिवियर एक्यूट रेस्पिरेटरी सिंड्रोम (सार्स), मार्स सीओवी, मारबर्ग वायरस व हेंड्रा को फैलाता है। मगध विश्वविद्यालय के पीजी डिपार्टमेंट ऑफ जूलॉजी के पीएचडी स्कॉलर मो. दानिश के मुताबिक गया शहर इस प्रजाति के चमगादड़ पहले कभी नहीं देखे गये हैं।
फल को नुकसान पंहुचा सकता है
मो दानिश ने बताया कि चमगादड़ फल उत्पादकों के लिए भी खतरा हैं। फ्रूट बैट कीटभक्षी चमगादड़ों से अलग होते हैं। ये फल खाते हैं। फलों का पता लगाने के लिए सूंघने की क्षमता का प्रयोग करते हैं, जबकि कीट भक्षी चमगादड़ प्रतिध्वनि की सहायता से अपने शिकार का पता लगाते हैं। फलों को नुकसान तो पहुंचाते तो ही हैं। इन चमगादड़ों की मौजूदगी शहर में वायरल संक्रमण के खतरे को आमंत्रण दे सकता है।