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कदम : बच्चों के लिए खुला बालमित्र थाना, राजस्थान सरकार ने की सकारात्मक पहल

बच्चों के लिए खुला बालमित्र थाना, राजस्थान सरकार ने की सकारात्मक पहल

डेस्क: 

हालिया दिनों में बच्चों के खिलाफ होने वाली आपराधिक वारदातों में काफी इजाफा हुआ है। बच्चों के खिलाफ यौन शोषण, बालश्रम, हत्या, बदसलूकी और शारीरिक उत्पीड़न जैसी घटनाओं में बढ़ोतरी देखने को मिली है। बच्चे ऐसे अपराधों का शिकार भी हैं और कई बार वे खुद अपराधी भी होते हैं। चिंताजनक बात ये भी है कि बच्चे अपने साथ हुए अपराधों को बयां भी नहीं कर पाते। डरते हैं।

सामान्य थानों में वे अपनी हालत बयां नहीं कर पाते। इसलिए राजस्थान सरकार ने उनके लिए काफी सकारात्मक पहल की है। राजस्थान सरकार प्रदेश भर में बालमित्र थानों की स्थापना करने जा रही है। 

राज्यभर में कुल 20 बालमित्र थाने खुलेंगे
राजस्थान सरकार ने पायलट प्रोजेक्ट के रूप में सबसे पहले 20 बालमित्र थानों की स्थापना की योजना बनाई है। इस सिलसिले में अजमेर जिले में 2 बालमित्र थाना स्थापित किया गया है। अजमेर के क्रिश्चियन गंज और रामगंज थाना के एक हिस्से में बालमित्र थाना भी स्थापित किया गया है।

इसके लिए अलग से कुछ भवनों का निर्माण किया गया है जहां बच्चों के लिए कई तरह की सुविधाएं उपलब्ध है। लक्ष्य है कि किसी भी प्रकार के अपराध के शिकार बच्चों की यहां काउंसिलिंग की जा सके। दरअसल, बच्चे शारीरिक प्रताड़ना से तो इलाज की बदौलत उबर जाते हैं लेकिन अपराध की वजह से हुआ मानसिक घाव जल्दी नहीं भरता। बालमित्र थानों में बच्चों को मानसिक प्रताड़ना से बाहर निकालने का प्रयास होगा। 

बालमित्र थानों में मानसिक प्रताड़ना से राहत
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि बाल आयोग और कैलाश सत्यार्थी फाउंडेशन के सहयोग से बालमित्र थानों की स्थापाना की जा रही है। बालमित्र थाने में यौन शोषण, मानव तस्करी, बालश्रम तथा बाल अपराध के शिकार बच्चों को मानसिक प्रताड़ना से बचाने की कवायद की जायेगी।

इन थानों में विशेष तौर पर यौन शोषण के शिकार बच्चों-बच्चियों तथा किशोरियों को बेहतर वातावरण मिलेगा। उनकी काउंसिलिंग होगी। उनको अपराध की बुरी यादों से बाहर निकाला जायेगा। प्राप्त जानकारी के मुताबिक अजमेर रेंज के आईजी रूपेंद्र पाल और एसपी चुनाराम जाट अजमेर में इनका उद्घाटन करेंगे। 

साइबर क्राइम के प्रति जागरूक किए जाएंगे बच्चे
राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो के आंकड़ो के मुताबिक साल 2021 में बच्चों के खिलाफ अपराध के 1 लाख 28 हजार 531 मामले दर्ज किए गए थे। चाइल्ड राइट्स एंड यू ने अपने विश्लेषण में कहा था कि 2019 के मुकाबले बच्चों के खिलाफ अपराध के मामलों में 13.3 फीसदी गिरावट आई थी। 2019 में बच्चों के खिलाफ अपराध के 1 लाख 48 हजार 185 मामले दर्ज किए गए थे।

हालिया दिनों में बच्चे ऑनलाइन गेम्स के जरिए भी अपराधों का शिकार हुए हैं। बालमित्र थानों में बच्चों को साइबर क्राइम के प्रति भी जागरूक किया जायेगा।