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पलामू के पूर्व सांसद बृजमोहन राम बने ओडिशा के राज्यपाल

पलामू के पूर्व सांसद बृजमोहन राम बने ओडिशा के राज्यपाल

नई दिल्ली/पलामू
Plamu News: राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने सोमवार देर रात छह राज्यों के राज्यपालों (Governors) की नियुक्ति और फेरबदल (Appointment and Reshuffle) से जुड़े फैसले लिए। इस बदलाव में झारखंड के पलामू से तीन बार सांसद रह चुके वरिष्ठ भाजपा नेता ब्रजमोहन राम को ओडिशा का राज्यपाल (Governor) नियुक्त किया गया है। किसान परिवार से निकलकर राजनीति में अपनी पहचान बनाने वाले ब्रजमोहन राम विधायक (MLA) के रूप में भी अपनी सेवाएं दे चुके हैं। उनके राज्यपाल बनने से झारखंड, खासकर पलामू क्षेत्र की राजनीतिक हस्ती को राष्ट्रीय स्तर (National Level) पर नई पहचान मिली है। राष्ट्रपति की ओर से की गई इन नियुक्तियों में नए राज्यपालों की नियुक्ति (New Appointments) के साथ कुछ मौजूदा राज्यपालों के कार्यक्षेत्र में भी बदलाव (Reshuffle) किया गया है। इन फैसलों को राजनीतिक और सामाजिक समीकरणों (Political and Social Equations) के लिहाज से भी अहम माना जा रहा है।

ब्रजमोहन राम का राजनीतिक सफर
ब्रजमोहन राम झारखंड के वरिष्ठ भाजपा नेताओं में शामिल हैं। उनका राजनीतिक सफर किसान परिवार से शुरू हुआ। उन्होंने पलामू लोकसभा क्षेत्र का तीन बार प्रतिनिधित्व किया है। इसके अलावा वे लातेहार से विधायक भी रह चुके हैं। अब उन्हें ओडिशा के राज्यपाल की जिम्मेदारी सौंपी गई है। उनकी नियुक्ति को झारखंड के राजनीतिक परिदृश्य के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

1 जनवरी 1958 को पलामू जिले के चंदवा में हुआ जन्म
ब्रजमोहन राम का जन्म 1 जनवरी 1958 को पलामू जिले के चंदवा में हुआ था। उन्होंने लोहरदगा स्थित बीएस कॉलेज से स्नातक की शिक्षा प्राप्त की। पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने राजनीति में कदम रखा और धीरे-धीरे क्षेत्रीय राजनीति में अपनी पहचान बनाई।

1991 में शुरू हुआ संसदीय राजनीति का सफर
ब्रजमोहन राम की राजनीतिक यात्रा वर्ष 1991 में शुरू हुई, जब वह अविभाजित बिहार विधानसभा के सदस्य निर्वाचित हुए। उन्होंने वर्ष 1995 तक विधायक के रूप में कार्य किया। इसके बाद वर्ष 1996 में भारतीय जनता पार्टी के टिकट पर पलामू लोकसभा सीट से चुनाव जीतकर पहली बार संसद पहुंचे। उनकी राजनीतिक सफलता का सिलसिला यहीं नहीं रुका। वर्ष 1998 और 1999 के लोकसभा चुनावों में भी उन्होंने जीत दर्ज की। इस तरह वह लगातार तीन बार पलामू का प्रतिनिधित्व करते हुए लोकसभा पहुंचे। अपने संसदीय कार्यकाल के दौरान उन्होंने संसद की विभिन्न समितियों में भी जिम्मेदारी निभाई।

2004 में मिली हार, संगठन में बने रहे सक्रिय
वर्ष 2004 के लोकसभा चुनाव में ब्रजमोहन राम को हार का सामना करना पड़ा। हालांकि, चुनावी हार के बाद भी भाजपा संगठन में उनकी सक्रियता बनी रही। वह झारखंड में भाजपा अनुसूचित जाति मोर्चा से जुड़ी विभिन्न जिम्मेदारियां भी निभा चुके हैं।

पलामू से ओडिशा तक नई जिम्मेदारी
पलामू की राजनीति में लंबे समय तक सक्रिय रहे ब्रजमोहन राम की राज्यपाल पद पर नियुक्ति उनके सार्वजनिक जीवन का महत्वपूर्ण अध्याय है। राज्यपाल के रूप में उनकी भूमिका संविधान के दायरे में राज्य के संवैधानिक प्रमुख के दायित्वों का निर्वहन करना होगा। उनके राजनीतिक सफर में विधायक, सांसद और संगठनात्मक पदाधिकारी के रूप में निभाई गई भूमिकाएं महत्वपूर्ण रही हैं। अब ओडिशा के राज्यपाल के रूप में उनकी नई जिम्मेदारी पर राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों की नजर रहेगी।

सुधा यादव, ढाल सिंह बिसेन और दुष्यंत गौतम को भी जिम्मेदारी
राज्यपालों की नई नियुक्तियों में हरियाणा की पूर्व सांसद सुधा यादव, मध्य प्रदेश के पूर्व सांसद ढाल सिंह बिसेन और भाजपा नेता दुष्यंत गौतम के नाम भी शामिल हैं। सुधा यादव को कर्नाटक का राज्यपाल नियुक्त किया गया है, जबकि ढाल सिंह बिसेन को उत्तराखंड की जिम्मेदारी सौंपी गई है। बिसेन उत्तराखंड में गुरमीत सिंह का स्थान लेंगे। वहीं, दुष्यंत गौतम को सिक्किम का राज्यपाल बनाया गया है।

ओम प्रकाश माथुर को केरल, आर्लेकर को तमिलनाडु
राज्यपालों के फेरबदल के तहत सिक्किम के राज्यपाल ओम प्रकाश माथुर को केरल का राज्यपाल नियुक्त किया गया है। वहीं, केरल के राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर को तमिलनाडु की जिम्मेदारी दी गई है। आर्लेकर पहले से ही तमिलनाडु का अतिरिक्त प्रभार संभाल रहे थे। अब उन्हें इस राज्य की जिम्मेदारी औपचारिक रूप से सौंप दी गई है।

सामाजिक समीकरणों पर भी नजर
इन नियुक्तियों को सामाजिक समीकरणों के लिहाज से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, नए राज्यपालों में दो दलित समुदाय, दो पिछड़ा वर्ग और दो सामान्य वर्ग से आते हैं। इस तरह नियुक्तियों के जरिए अलग-अलग सामाजिक वर्गों को प्रतिनिधित्व देने का प्रयास दिखाई देता है। भाजपा की आगामी चुनावी रणनीति के संदर्भ में भी इन नियुक्तियों को अहम माना जा रहा है।

ओम प्रकाश माथुर की नियुक्ति को लेकर चर्चा
राजनीतिक सूत्रों के अनुसार, ओम प्रकाश माथुर को केरल का राज्यपाल बनाया जाना भाजपा की भावी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। माथुर को कुशल संगठनकर्ता के रूप में जाना जाता है। ऐसे में उनकी नियुक्ति को केरल में भाजपा के संगठनात्मक हितों के नजरिये से भी देखा जा रहा है। हालांकि, राज्यपाल का पद संवैधानिक होता है और पार्टी की रणनीति से जुड़े इन आकलनों को राजनीतिक विश्लेषण के तौर पर ही देखा जाना चाहिए। कुल मिलाकर, छह राज्यों में राज्यपालों की नियुक्ति और फेरबदल से प्रशासनिक जिम्मेदारियों में बदलाव हुआ है। वहीं, ब्रजमोहन राम की नियुक्ति झारखंड की राजनीति के लिए खास महत्व रखती है, क्योंकि पलामू से तीन बार सांसद रह चुके नेता को अब ओडिशा के राज्यपाल के रूप में संवैधानिक जिम्मेदारी मिली है।

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