डेस्कः
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) के वार्षिक शिखर सम्मेलन में शुक्रवार को हिस्सा लिया। गलवान घाटी में जून 2020 में हुई हिंसक झड़प के कारण भारत एवं चीन के बीच सीमा पर गतिरोध की स्थिति पैदा होने के बाद शी और मोदी पहली बार आमने-सामने हुए। इस शिखर सम्मेलन में भारत की उपस्थिति बेहद महत्वपूर्ण है। शिखर सम्मेलन के अंत में भारत इसकी अध्यक्षता ग्रहण करेगा। सितंबर 2023 तक यानी पूरे एक साल तक भारत शंघाई सहयोग संगठन (SCO) की अध्यक्षता करेगा।

कुछ बैठकें भी कर सकते हैं पीएम
इस सम्मेलन के बाद मोदी कुछ द्विपक्षीय बैठकें भी कर सकते हैं। वह पुतिन, मिर्जियोयेव और रईसी से मुलाकात कर सकते हैं। पीएम मोदी ने समरकंद रवाना होने से पहले एक बयान जारी कर कहा, 'मैं एससीओ शिखर सम्मेलन में सामयिक, क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर विचारों का आदान-प्रदान करने, एससीओ के विस्तार और संगठन के भीतर बहुआयामी और परस्पर लाभकारी सहयोग को और गहरा करने को लेकर उत्सुक हूं। '

क्या है शंघाई सहयोग संगठन (SCO) ?
शंघाई सहयोग संगठन (Shanghai Cooperation Organization, SCO) एक अंतर सरकारी संगठन है। यह संगठन राजनीति, अर्थशास्त्र, विकास और सेना के मुद्दों पर केंद्रित है। इसकी शुरुआत 1996 में चीन, रूस, कजाकिस्तान, ताजिकिस्तान और किर्गिस्तान के नेताओं द्वारा 'शंघाई फाइव' के रूप में हुई थी। वर्तमान में संगठन के आठ सदस्य देश शामिल हैं। इन देशों की सूची में भारत, पाकिस्तान और उज्बेकिस्तान सहित चार पर्यवेक्षक देश (Observer Countires) और छह संवाद भागीदार (Dialogue Partners) देश शामिल हैं। 2001 में संगठन का नाम बदलकर एससीओ कर दिया गया। इसका मुख्य उद्देश्य क्षेत्रीय सुरक्षा सुनिश्चित करना, सीमा मुद्दों को हल करना, आतंकवाद और धार्मिक अतिवाद का समाधान करना और क्षेत्रीय विकास को बढ़ाना है। आम तौर पर एससीओ को उत्तरी अटलांटिक संधि संगठन (NATO) के पूर्वी समकक्ष के रूप में देखा जाता है। एससीओ का एक उद्देश्य मध्य एशिया में अमेरिकी प्रभाव का मुकाबला करना है। इसलिए भारत में चीन के बाद दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी आबादी है। भारत और चीन दोनों ही देशों की उपस्थिति संगठन को सबसे बड़ा जनसंख्या कवरेज देती है।