दिल्लीः
शिबू सोरेन और उनके परिजनों के नाम पर आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने की शिकायत लोकपाल के समक्ष 2 वर्ष पूर्व 5 अगस्त 2020 को की गई थी। इसमें कहा गया था कि सोरेन और उनके परिजनों ने झारखंड के सरकारी खजाने का दुरुपयोग और भ्रष्टाचार से अर्जित राशि से अनेक संपत्तियां बनाई हैं। आज इस मामले में दिल्ली हाईकोर्ट में सुनवाई होनी थी। लेकिन भाजपा सांसद निशिकांत दुबे के वकील ने कोर्ट से समय की मांग कर दी है। कोर्ट ने आग्रह स्वीकार कर लिया है। सुनवाई के लिए अगली तारीख दे दी गई है। इससे पहले 12 सितंबर को दिल्ली हाईकोर्ट ने लोकपाल में चल रही सुनवाई पर रोक लगा दिया था। शिबू सोरेन ने सीबीआई को प्रारंभिक जांच की कार्यवाही और आदेश को चुनौती दी है। निशिकांत दुबे ने अगस्त 2020 में की गई शिकायत में दावा किया था कि सोरेन और उनके परिवार के सदस्यों ने सरकारी खजाने का दुरुपयोग करके काफी धन-सम्पत्ति अर्जित की है और वे घोर भ्रष्टाचार में लिप्त हैं। जब इस कार्रवाई पर रोक लगा दिया गया था तो इस आदेश को दुबे ने वापस लेने की मांग की, जिसके बाद आज का दिन सुनवाई के लिए तय किया गया था।

क्या है मामला
लोकपाल की फुल बेंच ने 15 सितंबर, 2020 को सीबीआई को लोकपाल और लोकायुक्त अधिनियम, 2013 की धारा 20 (1) (ए) के तहत मामले में पीई (प्रीलिमिनरी इन्क्वायरी) दर्ज कर 6 महीने में रिपोर्ट सौंपने का आदेश दिया था। सीबीआई ने मामले की जांच के बाद मार्च 2021 और 1 जुलाई 2021 को सोरेन परिवार की संपत्ति का पूरा ब्यौरा और उनके आयकर रिटर्न पर लोकपाल को रिपोर्ट सौंपी थी। जिसके बाद लोकपाल ने शिबू सोरेन और परिवार के सदस्यों को नोटिस भेजकर उनका पक्ष मांगा था। मिले पक्ष के आलोक में सीबीआई ने अंतिम पीई रिपोर्ट बीते 29 जून को लोकपाल को दी। इसमें सीबीआई की ओर से कहा गया है कि सोरेन और परिवार के सदस्यों ने आय से अधिक संपत्ति अर्जित की है। लोकपाल ने अपने आदेश में कहा था कि सीबीआई की विस्तृत रिपोर्ट के अवलोकन के आधार पर ये पाया गया है कि इस मामले में धारा 20(3) के अंतर्गत प्रोसिडिंग शुरू की जानी चाहिए। इस सिलसिले में शिबू सोरेन को लोकपाल की ओर से नोटिस जारी किया गया था.