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वेदांता ग्रुप के कई ठिकानों पर ED के छापे, विदेशी मूल की ये कंपनी कंपनी भारी कर्ज में डूबी है

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द फॉलोअप डेस्क 

प्रवर्तन निदेशालय (ED) 2 जून को अनिल अग्रवाल के नेतृत्व वाले वेदांता ग्रुप के ठिकानों पर छापेमारी की है। ये छापे रॉयल्टी पेमेंट से जुड़े फॉरेन एक्सचेंज मैनेजमेंट एक्ट (FEMA) के नियमों के कथित उल्लंघन से संबंधित हैं। यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है, जब कंपनी एक डीमर्जर (विभाजन) प्रक्रिया को लागू करने की तैयारी में है, जिसके तहत मौजूदा कारोबार को पांच अलग-अलग वर्टिकल्स में बांटा जा रहा है। ईडी की टीम गड़बड़ी से संबंधित कागजात की तलाश में लगी है। 
ये तलाशी वेदांता द्वारा अपनी मूल कंपनी, वेदांता रिसोर्सेज को किए गए रॉयल्टी पेमेंट की जांच से जुड़ी हैं। ये तलाशी मुंबई और दिल्ली स्थित वेदांता के दफ्तरों में की जा रही हैं। सुबह 11.45 बजे, वेदांता का शेयर 0.7 प्रतिशत की गिरावट के साथ 334.6 रुपये पर कारोबार कर रहा था।

वेदांता के एक प्रवक्ता ने कहा, "हम अधिकारियों को पूरा सहयोग दे रहे हैं और मांगी गई सभी जानकारी उपलब्ध करा रहे हैं। कंपनी सभी लागू कानूनों और नियमों का पालन करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। चूंकि यह मामला अभी नियामक प्रक्रिया के अधीन है, इसलिए हम इस चरण पर इस पर आगे कोई टिप्पणी नहीं कर सकते।"

बता दें कि वेदांता लिमिटेड इस ग्रुप की भारत में लिस्टेड इकाई है, जिसका मार्केट कैपिटलाइजेशन 1.3 लाख करोड़ रुपये है। वेदांता रिसोर्सेज, जो कि UK स्थित एक इकाई है, वेदांता लिमिटेड की मूल कंपनी है। वेदांता की यह विदेशी मूल कंपनी भारी कर्ज में डूबी हुई है, और इसकी भारतीय इकाई ने अक्सर अपनी मूल कंपनी को भारी-भरकम रॉयल्टी का भुगतान किया है। विभिन्न रिपोर्ट्स के अनुसार, वेदांता रिसोर्सेज पर कुल 74,000 करोड़ रुपये का कर्ज है।
मई में, कंपनी को डीमर्जर प्रक्रिया के लिए विभिन्न नियामक मंजूरियां प्राप्त हुईं, जिसके परिणामस्वरूप चार नई लिस्टेड इकाइयां स्टॉक एक्सचेंजों पर कारोबार करेंगी। वेदांता लिमिटेड का अस्तित्व बना रहेगा, जिसके अंतर्गत हिंदुस्तान जिंक, जिंक इंटरनेशनल, कॉपर, फेरो क्रोम और नए टेक वेंचर्स शामिल होंगे।
 

Tags - ED Raids Vedanta Group Foreign Origin Company Heavy Debt