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रांची में शर्मनाक कृत्य, कुत्ते को बांधकर पीटने का वीडियो वायरल; आरोपी गिरफ्तार

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द फॉलोअप डेस्क

रांची के धुर्वा थाना क्षेत्र अंतर्गत शालीमार बाजार के पास एक बेजुबान कुत्ते को बिजली के खंभे से बांधकर बेरहमी से पीट-पीटकर मार डाला गया। उस कुत्ते का न कोई जुर्म था, न उसने किसी पर हमला किया था। वह किसी को डरा नहीं रहा था। मार खाते वक्त वह अपने बचाव की गुहार तक नहीं लगा पा रहा था। बस डरी हुई आंखें थीं और कांपता हुआ शरीर। सवाल यह है कि आखिर उस बेजुबान ने कौन-सा कानून तोड़ा था, जिसकी उसे ऐसी क्रूर मौत की सजा दी गई? सच तो यह है कि वहां हर वार के साथ कुत्ता नहीं, बल्कि इंसानियत मर रही थी। क्या जरा सा भी उन बेरहम लोगों का दिल नहीं पसीजा? क्या एक पल के लिए भी उनके हाथ नहीं कांपे? या कुत्ते को मारते-मारते इंसान के अंदर का इंसान पूरी तरह मर चुका था?

सबसे हैरानी की बात यह रही कि घटना के दौरान कई लोग मौके पर मौजूद थे। कुछ लोगों ने इस पूरे कृत्य का वीडियो बना लिया, लेकिन किसी ने आगे बढ़कर यह नहीं कहा कि “मत मारो, वह बेजुबान है, निर्दोष है।” इस क्रूरता का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद मामला पुलिस के संज्ञान में आया। धुर्वा थाने में सलोनी श्रीवास्तव द्वारा लिखित शिकायत दर्ज कराई गई, जिसके आधार पर पुलिस ने त्वरित कार्रवाई की। रांची पुलिस के अनुसार, इस मामले में मुख्य आरोपी मौसीबाड़ी निवासी दीपू सिंह को गिरफ्तार कर लिया गया है, जबकि दो नाबालिगों को निरुद्ध किया गया है। पुलिस अन्य आरोपियों की तलाश में लगातार छापेमारी कर रही है। मृत कुत्ते के शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम भी कराया गया है। रांची पुलिस ने प्रेस रिलीज जारी कर बताया कि वायरल वीडियो में कुछ लोग शालीमार बाजार में कुत्ते को बांधकर ईंट और पत्थरों से पीटते हुए साफ दिखाई दे रहे थे, जिसके आधार पर कार्रवाई की गई।

गौरतलब है कि राजधानी रांची में कुत्तों के साथ क्रूरता की यह पहली घटना नहीं है। साल 2025 में भी एक व्यक्ति द्वारा सड़क पर कुत्ते को गोली मारने का मामला सामने आया था, जिसका वीडियो वायरल होने के बाद आरोपी को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया था। लेकिन धुर्वा की यह घटना क्रूरता की सारी हदें पार करती है। आज आरोपी भले ही गिरफ्तार हो गए हों, कानून अपना काम कर रहा हो, लेकिन सवाल अब भी जिंदा है- बेजुबान को मारकर आखिर किसे सुकून मिला? किस दिल को शांति मिली? इस वीडियो ने यह साफ कर दिया है कि उस दिन कुत्ता नहीं मरा, इंसानियत मरी है। और याद रखिए जो समाज जानवरों पर दया नहीं करता, वह समाज एक दिन इंसानों के लिए भी सुरक्षित नहीं रह जाता।