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पथ निर्माण विभाग ने सहायक अभियंताओं का वेतन विनियमितीकरण कर हमेशा के लिए विवाद समाप्त किया

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रांची
पथ निर्माण विभाग ने 2022-23 में नियुक्त सहायक अभियंताओं का वेतन विनियमितीकरण कर विभिन्न विभागों के अभियंताओं की एक बड़ी समस्या का समाधान कर दिया है। इससे योगदान और प्रभार ग्रहण के बीच की अवधि के वेतन भुगतान को लेकर कई स्तरों पर होने वाली आपत्तियां अब समाप्त हो गयी है। दूसरे कार्य विभागों के अभियंताओं और अन्य विभागों के कर्मियों के भी इस तरह की समस्या का समाधान आसान हो जाएगा। हालांकि पथ निर्माण विभाग ने वित्त विभाग के तत्कालीन प्रधान सचिव अजय कुमार सिंह के हस्ताक्षर से 2022 में जारी उस संकल्प के आलोक में ही उपरोक्त नव नियुक्त सहायक अभियंताओं के वेतन का विनियमितीकरण किया है। वित्त विभाग के इस संकल्प में स्पष्ट किया गया है कि किसी भी कर्मी की प्रतीक्षा अवधि किसी भी कीमत पर 15 दिनों से अधिक नहीं होनी चाहिए। अगर ऐसा होता है तो इसके लिए दोषी अधिकारी के वेतन से राशि की कटौती की जाएगी।

जानकार बताते हैं कि 2022 से पूर्व नियुक्ति के बाद पदस्थापना में होने वाले विलंबित अवधि के वेतन भुगतान में भारी परेशानी हो रही थी। प्रतीक्षा अवधि का वेतन राशि लेने में संबंधित कर्मी का जूता घिस जाया करता था। जबकि पोस्टिंग नहीं होने के लिए संबंधित कर्मी कहीं से दोषी नहीं था। हालांकि इससे पूर्व 2007 में नियुक्त सहायक अभियंताओं का वेतन विनियमितीकरण कर पथ निर्माण विभाग पहले ही विवादों का पटाक्षेप कर चुका था। 26 नवंबर 2008 में पथ निर्माण विभाग द्वारा जारी पत्र में यह स्पष्ट किया गया कि 2007 में नियुक्त सहायक अभियंताओं को योगदान की तिथि से वेतन का भुगतान किया जाएगा। यहां मालूम हो कि 14 नवंबर 2022 में पथ निर्माण विभाग में पहले 208 सहायक अभियंताओं की नियुक्ति का आदेश जारी किया गया। उसके बाद अलग अलग तिथियों को इन सहायक अभियंताओं ने विभाग में योगदान दिया। लेकिन इनकी पोस्टिंग फरवरी 2023 में हुई। इसको लेकर नियुक्ति और पोस्टिंग के बीच की अवधि को लेकर पथ निर्माण विभाग में भी कई तरह के सवाल खड़ा किए गए। लेकिन वित्त विभाग के आदेश और अन्य दृष्टांतों के अलावा सुभद्रा कुमारी मामले में हाईकोर्ट द्वारा दिए गए आदेश के आलोक में नवंबर 2022 में नियुक्त सहायक अभियंताओं का भी वेतन विनियमितीकरण कर दिया गया।


मालूम हो कि डॉ. सुभद्रा कुमारी की नियुक्ति 02.07.1999 को हो गई थी और उन्होंने 05.07.1999 को विभाग में योगदान भी दे दिया था। विभाग ने उन्हें 29.12.1999 तक पोस्टिंग नहीं दी, इसलिए वे विभागीय आदेश की प्रतीक्षा में रहीं। पहले वह प्रतीक्षा अवधि के वेतन भुगतान को लेकर लोक अदालत में गयी। लोक अदालत ने उनके पक्ष में फैसला दिया। लेकिन विभाग ने लोक अदालत के फैसले के बाद भी अड़ंगा खड़ा करता रहा। इसके बाद सुभद्रा कुमारी झारखंड हाईकोर्ट की शरण ली। हाईकोर्ट ने माना कि जब कर्मचारी ने समय पर जॉइन कर लिया था, तो केवल पोस्टिंग आदेश लंबित रहने के कारण वेतन और सेवा लाभ से वंचित नहीं किया जा सकता। राज्य सरकार ने पहले के न्यायालय आदेश के बावजूद पुनः वही आपत्ति उठाकर वेतन देने से इंकार किया, जिसे कोर्ट ने न्यायालय आदेश की अवहेलना माना। वर्ष 2017 में  उच्च न्यायालय झारखंड द्वारा विभाग के 24.08.2011 के आदेश को रद्द करते हुए निर्देश दिया कि 05.07.1999 से 29.12.1999 तक की सेवा नियमित (regularise) की जाए तथा उस अवधि का वेतन और सभी परिणामी लाभ दिए जाएँ। राज्य सरकार पर वादी के पक्ष में भुगतान हेतु लागत 10000 (cost) भी लगाया गया क्योंकि याचिकाकर्ता को अनावश्यक रूप से दूसरी बार मुकदमा करना पड़ा।


हालांकि सचिवालयी जानकार बताते हैं कि अब नियुक्ति और पोस्टिंग के बीच की अवधि के वेतन भुगतान का विषय तत्कालीन वित्त सचिव अजय कुमार सिंह के हस्ताक्षर से जारी आदेश से ही समाप्त हो चुका है। इसी पत्र के आलोक में पथ निर्माण विभाग ने ही 3 फरवरी 2026 को 298 कनीय अभियंताओं का वेतन विनियमित कर चुका है। इसके अलावा जल संसाधन विभाग ने भी अपने अभियंताओं का वेतन विनियमित कर चुका है। इतना ही नहीं 2022 में नियुक्त सहायक अभियंताओं का वेतन विनियमितीकरण पर सवाल खड़ा करने वालों से विभाग के जानकार भी प्रश्न पूछते हैं कि क्या पिछले 6-8 महीने से कार्मिक एवं प्रशासनिक सुधार विभाग में योगदान देने के बाद पोस्टिंग की प्रतीक्षा कर रहे लगभग 55 राज्य प्रशासनिक सेवा के अधिकारी, लगभग एक महीने से पोस्टिंग की प्रतीक्षा कर रहे 12 आईएएस अधिकारियों का वेतन विनियमीतकरण नहीं होगा। या उससे पूर्व भी इसी तरह प्रतीक्षा में रहनेवाले कर्मचारियों और अधिकारियों का वेतन विनियमितीकरण नहीं हुआ है।

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