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सरकार ने 9 DSP को रिवर्ट किया, हाईकोर्ट ने इंस्पेक्टर के लिए बनायी जा रही सीनियरिटी लिस्ट पर रोक लगायी

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रांची
गृह, कारा एवं आपदा प्रबंधन विभाग ने 12 मई को एक आदेश जारी कर  पुलिस उपाधीक्षकों (DSP) की वरीयता (seniority) और प्रोन्नति (promotion) से जुड़ा एक बड़ा फैसला लिया गया है। झारखंड हाईकोर्ट के आदेश के बाद गृह विभाग ने यह फैसला किया है। इस फैसले से कई अधिकारियों को प्रोन्नति दी गयी है जबकि कुछ को पदावनत किया गया है। कोर्ट ने अपने आदेश में कहा है कि DSP अधिकारियों की वरीयता JPSC परीक्षा में प्राप्त अंकों के आधार पर दोबारा तय की जाए। साथ ही गलत वरीयता सूची को रद्द किया जाए। सही वरीयता सूची का प्रकाशन कर संबंधित अधिकारी को लाभ दिया जाए।

इसके बाद कुछ डीएसपी को “वरीय पुलिस उपाधीक्षक” (Senior DSP) के पद पर प्रोन्नति दी गयी जबकि कुछ अधिकारियों को पुराने मूल DSP कैडर में वापस किया गया क्योंकि उनकी वरिष्ठता नीचे चली गई। गृह विभाग के आदेश के बाद 9 अधिकारियों को Senior DSP बनाया गया है, जिनके नाम नाजीर अख्तर,प्रवीण कुमार सिंह,मनीष कुमार,नीरज कुमार,मोजम्मुल रहमान,विकास आनंद लुगुन,अनुज उरांव,प्रदीप पाल कच्छप औरअमित कुमार कच्छप हैं। इसके अलावा नौ अन्य अधिकारियों को पदावनत किया गया है। ये मूल डीएसपी कैडर में भेजे गये हैं। उनके नाम इस प्रकार हैं- सुमित कुमार,सुशीलोतम कुमार सिंह,दीपक कुमार,ज्ञान रंजन,सुनील कुमार रजवार,विजय कुमार महतो,कौशर अली और संजीव कुमार बेसरा। गृह विभाग के इस आदेश से पुलिस प्रशासन की वरीयता सूची बदल गयी है। इसलिए अब इसका असर भविष्य में होनेवाली आईपीएस में प्रमोशन पर भी पड़ेगा।


इधर दारोगा से इंस्पेक्टर रैंक में प्रोन्नति के लिए बनायी जा रही वरीयता सूची पर हाईकोर्ट ने रोक लगा दी है। न्यायमूर्ति दीपक रोशन की अदालत ने अपने आदेश में सरकार को तत्काल प्रभाव से रोक लगाने का आदेश दिया है। प्रार्थी की ओर से अदालत में मनोज टंडन ने पैरवी की थी। पूरा मामला यह था कि 2017 में लिमिटेड परीक्षा और सीधी नियुक्ति के माध्यम से दारोगा पद पर नियुक्ति की गयी थी। 2017 में लिमिटेड एग्जाम के लिए विज्ञापन संख्या 9/2017 एवं सीधी नियुक्ति के लिए 5/2017 था। अर्थात सीधी नियुक्ति के लिए विज्ञापन पहले प्रकाशित किया गया था। लेकिन विभाग द्वारा जो सीनियरिटी लिस्ट बनायी जा रही थी उसमें लिमिटेड एग्जाम में सफल अभ्यर्थियों को ऊपर किया जा रहा था। इसी के विरोध में दारोगाओं द्वारा हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की गयी थी।

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