द फॉलोअप रांची
JPSC और JSSC की भर्ती परीक्षाओं में धांधली के दावों को लेकर छात्र लगातार आंदोलनरत रहे हैं। सरकार द्वारा कुछ परीक्षाएं रद्द करने और सीआईडी जांच तेज करने के बाद जो छात्र आंदोलन थमता दिख रहा था, भाजपा ने अब उस मुद्दे को फिर से केंद्र में ला खड़ा किया है। बुधवार को भाजपा के प्रतिनिधिमंडल (प्रदेश नेतृत्व अदित्य साहू, नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी और अमर बाउरी समेत कई नेताओं) ने प्रोजेक्ट भवन पहुंचकर मुख्य सचिव से मुलाकात की। उन्होंने 48 घंटे का सख्त अल्टीमेटम दिया है। जानकारों की मानें तो हाईकोर्ट में 15 सितंबर की सुनवाई के बाद भाजपा के छात्र आंदोलन का असली चेहरा सामने आएगा।

बीजेपी ने मांग के साथ दिया अल्टीमेटम भी
प्रदर्शनकारी छात्रों पर दर्ज सभी FIR तुरंत वापस ली जाएं। JPSC-JSSC धांधली की राज्य सरकार की CID जांच को 'आंखों का धोखा' बताते हुए पूरे मामले की जांच CBI को सौंपी जाए। आयोग के शीर्ष अधिकारियों और जवाबदेह लोगों पर सीधी कार्रवाई हो।
राजनीतिक संजीवनी की तलाश में भाजपा ?
राजनीतिक विश्लेषण के लिहाज से इस घटनाक्रम को निम्न तीन मुख्य एंगलों से भी देखा जा सकता है। राज्य में युवाओं और परीक्षार्थियों का वर्ग काफी बड़ा और संवेदनशील वोट बैंक है। परीक्षाओं में देरी और पेपर लीक जैसी घटनाओं से छात्रों में गहरी नाराजगी है। भाजपा इस जनाक्रोश को सीधे राजनीतिक आंदोलन में बदलकर सत्ता पक्ष (JMM-कांग्रेस गठबंधन) को बैकफुट पर धकेलना चाहती है।
सड़क से सदन तक दबाव
48 घंटे की समय सीमा और "प्रशासन संभाल नहीं पाएगा" जैसी सीधी चेतावनी देकर अमर बाउरी और भाजपा नेताओं ने स्पष्ट संकेत दिया है कि यदि मांगें पूरी नहीं हुईं तो वे पूरे राज्य में आक्रामक प्रदर्शन (चक्का जाम, राज्यव्यापी आंदोलन) करेंगे।
.jpeg)
युवाओं के 'हमदर्द' की छवि
सत्तारूढ़ दल का आरोप है कि भाजपा शांत होते माहौल में छात्रों के कंधे पर बंदूक रखकर अपनी राजनीतिक जमीन सेक रही है। वहीं, भाजपा का दावा है कि वह दमन चक्र का शिकार हो रहे बेकसूर छात्रों के हक और पारदर्शी पारदर्शी व्यवस्था के लिए सड़क पर उतर रही है।कुल मिलाकर, भाजपा 48 घंटे के अल्टीमेटम के बहाने छात्र आंदोलन की आग को बुझने नहीं देना चाहती, ताकि राज्य में युवाओं के असंतोष को सीधे चुनावी और राजनीतिक मुद्दे में तब्दील किया जा सके।
छात्र आंदोलन के बीच कई अन्य आंदोलनों पर भी नजर
छात्र आंदोलन और उनकी मांगों को लेकर भाजपा ने आक्रामक तेवर के संकेत दिए हैं। लेकिन छात्र आंदोल के बीच राज्य में चल रहे कई अन्य आंदोलनों पर भी राजनीतिक प्रेक्षकों की पैनी नजर है। इनमें खनिज संशोधन विधेयक को लेकर जारी आंदोलन के अलावा परिसीमन और पुलिसकर्मियों का आंदोलन प्रमुख है। छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो का जिला भ्रमण भी उनमें से एक है। राजनीतिक गलियारे में एक आंदोलन का उद्देश्य दूसरे आंदोलन को कमजोर करना बताया जा रहा है।
