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‘दावत-ए-जंगल’ कार्यक्रम में एस अली ने उठाये स्थानीय नीति, SIR, शिक्षा और अल्पसंख्यक अधिकारों पर सवाल

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रांची

झारखंडियों के अधिकार, युवाओं के भविष्य और मुस्लिम समुदाय से जुड़े न्यायपूर्ण मुद्दों को लेकर आमया संगठन की ओर से रातू प्रखंड के पाली पतरा में “दावत-ए-जंगल” कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में संगठन के केंद्रीय अध्यक्ष एस अली ने राज्य सरकार की नीतियों पर सवाल उठाते हुए मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के नाम सुझाव पत्र जारी किया।
एस अली ने कहा कि बिना स्पष्ट स्थानीय नीति के हो रही बहालियों से झारखंड के स्थानीय युवाओं के अधिकार छीने जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि पेसा कानून के तहत आदिवासी समुदाय के पारंपरिक अधिकारों का सम्मान जरूरी है, लेकिन साथ ही मूलवासी समाज के अधिकारों की भी समुचित सुरक्षा होनी चाहिए। एसआईआर प्रक्रिया के दौरान 2003 की मतदाता सूची में पाई गई त्रुटियों का जिक्र करते हुए उन्होंने 1995 की वोटर लिस्ट से भी मिलान की मांग की।


उन्होंने आरोप लगाया कि पिछड़ी जातियों को आबादी के अनुपात में न तो आरक्षण मिल रहा है और न ही सरकारी नियुक्तियों में आयु सीमा में छूट। विश्वविद्यालयों में कुलपति और प्रतिकुलपति के पद खाली पड़े हैं, वहीं माध्यमिक और प्रारंभिक विद्यालयों में हजारों शिक्षकों के पद वर्षों से रिक्त हैं। निजी क्षेत्र में स्थानीय युवाओं को 75 प्रतिशत आरक्षण लागू करने और पिछड़ी जातियों की केंद्र से बकाया छात्रवृत्ति राशि दिलाने की मांग भी रखी गई।
कार्यक्रम में यह भी कहा गया कि वर्ष 2021 में विधानसभा से पारित मॉब लिंचिंग रोकने से संबंधित विधेयक अब तक कानून के रूप में लागू नहीं हो पाया है, जबकि राज्य में ऐसी घटनाएं बढ़ रही हैं। इसके अलावा, मुस्लिम धार्मिक स्थलों के पंजीकरण, अल्पसंख्यक बोर्ड व आयोगों में स्थायी पदों की नियुक्ति, अल्पसंख्यक निदेशालय की स्थापना और आलिम-फाजिल डिग्री के लिए विश्वविद्यालय गठन जैसे मुद्दों को भी प्रमुखता से उठाया गया।
कार्यक्रम में मौजूद लोगों ने जनहित से जुड़े इन सभी मुद्दों पर मुख्यमंत्री के नाम सुझाव पत्र सौंपा। इससे पहले कार्यक्रम में शामिल अतिथियों का गुलदस्ता देकर स्वागत किया गया।

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