द फॉलोअप डेस्क
जामताड़ा जिले के महिला कॉलेज में यूजी सेमेस्टर-2 की परीक्षा को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। छात्राओं ने आरोप लगाया है कि निर्धारित तिथि के बजाय एक दिन पहले ही परीक्षा ले ली गई, ऐसे में करीब 50 छात्राएं परीक्षा देने से वंचित रह गईं। इस मामले को लेकर छात्राओं ने उपायुक्त को आवेदन सौंपकर पुनः परीक्षा आयोजित कराने की मांग की है। छात्राओं का कहना है कि पॉलिटिकल साइंस, एमडीसी ग्रुप-सी की परीक्षा की तिथि 17 फरवरी तय थी, लेकिन कॉलेज प्रशासन ने एक दिन पहले ही परीक्षा ले ली। निर्धारित तिथि पर जब छात्राएं परीक्षा देने कॉलेज पहुंचीं, तो उन्हें यह कहकर अंदर प्रवेश नहीं दिया गया कि परीक्षा पहले ही संपन्न हो चुकी है।
परीक्षा देने आई प्रतिभा कुमारी ने कहा, "मैं महिला कॉलेज की छात्रा हूं। हमारे एग्जाम की तारीख आज थी, लेकिन कल ही जियोलॉजी एमडीसी ग्रुप-सी का एग्जाम ले लिया गया। जब हम लोग आज एग्जाम देने पहुंचे तो कॉलेज प्रशासन ने कहा कि आप लोग रूटीन ठीक से नहीं देखते हैं और हमें अंदर नहीं जाने दिया। हम लोग दोबारा परीक्षा लेने की मांग कर रहे हैं।" वहीं एक और छात्रा कल्याणी कुमारी ने कहा, "हम लोग सेमेस्टर-2 का एग्जाम दे रहे थे। रूटीन के अनुसार परीक्षा आज थी, लेकिन कल ले ली गई। जब आज कॉलेज पहुंचे तो बताया गया कि परीक्षा हो चुकी है। इसी को लेकर हम लोगों ने उपायुक्त को आवेदन दिया है।” छात्राओं का आरोप है कि परीक्षा तिथि को लेकर स्पष्ट सूचना नहीं दी गई, जिसके कारण वे भ्रमित हो गईं और परीक्षा से वंचित रह गईं। उन्होंने जिला प्रशासन से हस्तक्षेप कर न्याय दिलाने की मांग की है।
इधर, कॉलेज प्रशासन ने छात्राओं के आरोपों को खारिज किया है। प्रोफेसर रत्नेश कुमार झा ने कहा, "छात्राओं द्वारा लगाए जा रहे आरोप पूरी तरह गलत हैं। परीक्षा कार्यक्रम में स्पष्ट रूप से एमडीसी फ्लोवाइज ग्रुप का उल्लेख है। जिस ग्रुप में जो विषय है, उसी तिथि पर परीक्षा ली जाती है। एमडीसी जियोलॉजी और बॉटनी की परीक्षा पहले ही हो चुकी है। छात्राएं अपने ऑनर्स ग्रुप को देखकर आई थीं। यह विश्वविद्यालय की परीक्षा है, घरेलू परीक्षा नहीं। विश्वविद्यालय के आदेश के अनुसार ही परीक्षा ली गई है।" अब सवाल यह उठ रहा है कि परीक्षा तिथि को लेकर भ्रम की स्थिति कैसे उत्पन्न हुई। एक ओर छात्राएं पुनः परीक्षा की मांग कर रही हैं, वहीं कॉलेज प्रशासन अपने पक्ष पर कायम है। अब सबकी निगाहें जिला प्रशासन के निर्णय पर टिकी हैं कि इस पूरे मामले में क्या कार्रवाई की जाती है।
.jpg)