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लॉ यूनिवर्सिटी के वार्षिकोत्सव आविर्भाव में बोले स्पीकर, कोई भी निर्णय अंतिम नहीं होता, समय के साथ उसमें आता है परिवर्तन

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द फॉलोअप डेस्क
कानून वास्तव में कॉमन सेंस पर आधारित होता है। यही कॉमन सेंस जब सामाजिक संव्यवहार में स्वीकार कर लिया जाता है, तब यह कानून का रूप ले लेता है। यह बातें झारखंड विधानसभा के स्पीकर रबींद्रनाथ महतो ने मंगलवार को नेशनल यूनिवर्सिटी ऑफ स्टडी एंड रिसर्च ऑफ लॉ के वार्षिकोत्सव आविर्भाव में आयोजित पॉलिसी मेकिंग कंपटीशन कौटिल्य में मुख्य अतिथि के रूप में कही। उन्होंने कहा कि कानून के छात्र के रूप में उन्हें हमेशा तार्किक रहना चाहिएकोई भी निर्णय अंतिम नहीं होता और समय के साथ उस निर्णय में परिवर्तन आता है ।

संविधान सभा में दिए गए वक्तव्य की चर्चा की
अपने भाषण में स्पीकर ने
डॉक्टर अंबेडकर द्वारा संविधान सभा में दिए गए वक्तव्य की भी चर्चा की। उस सभा में डॉक्टर अंबेडकर ने यह कहा था कि एक वकील के रूप में उन्होंने हमेशा पीठासीन न्यायाधीश से यह कहा है कि वह उनके निर्णय को मानने के लिए बाध्य हैं, परंतु यह आवश्यक नहीं कि उनके निर्णय का सम्मान भी करें। यह कानून के अंतर्गत एक वकील को दी गई आजादी है और वह यह आजादी कभी नहीं छोड़ सकते। कार्यक्रम में एनयूएसआरएल के कुलपति डॉक्टर केशवा राव वराकुला भी उपस्थित थे।

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