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बजट सत्र से पहले कांग्रेस की रणनीति तय करेगी सोनिया गांधी, मनरेगा से लेकर गवर्नर विवाद तक सरकार को घेरेगा विपक्ष

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द फॉलोअप डेस्क
संसद के बजट सत्र से पहले कांग्रेस अपनी रणनीति को अंतिम रूप देने में जुट गई है। कांग्रेस संसदीय दल की अध्यक्ष सोनिया गांधी 27 जनवरी को लोकसभा और राज्यसभा के वरिष्ठ नेताओं के साथ एक अहम रणनीतिक बैठक करेंगी। इस बैठक में 28 जनवरी से शुरू हो रहे बजट सत्र के दौरान एनडीए सरकार को घेरने की रूपरेखा तैयार की जाएगी। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण 1 फरवरी को लोकसभा में केंद्रीय बजट 2026-27 पेश करेंगी।

कांग्रेस के अंदरूनी सूत्रों के मुताबिक पार्टी इस सत्र में कई बड़े मुद्दों को जोर-शोर से उठाने की तैयारी में है। इनमें मनरेगा में प्रस्तावित बदलाव, दक्षिणी राज्यों में गवर्नरों की भूमिका का कथित राजनीतिकरण, कई राज्यों में मतदाता सूची के विशेष पुनरीक्षण (SIR) में गड़बड़ियां, चीन और पाकिस्तान से जुड़े विदेश नीति के सवाल और हालिया अमेरिकी टैरिफ के बाद भारतीय अर्थव्यवस्था पर पड़े असर जैसे विषय शामिल हैं।

लोकसभा में कांग्रेस के व्हिप मोहम्मद जावेद ने कहा कि मनरेगा पार्टी के लिए अहम मुद्दा है, लेकिन इसके अलावा भी कई ऐसे विषय हैं जिन पर सरकार से जवाब मांगा जाएगा। उन्होंने कहा कि विदेश नीति, अर्थव्यवस्था की स्थिति, बेरोजगारी, स्वच्छ पेयजल और हवा, तथा नागरिकों के मतदान अधिकार जैसे सवालों पर चर्चा जरूरी है।

28 जनवरी को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू संसद के दोनों सदनों की संयुक्त बैठक को संबोधित करेंगी। यह भाषण एनडीए सरकार की उपलब्धियों पर केंद्रित होगा और इसे कैबिनेट परंपरा के अनुसार तैयार किया जाएगा। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि पार्टी कर्नाटक, केरल और तमिलनाडु में गवर्नरों के हालिया व्यवहार से खास तौर पर नाराज है। इन राज्यों में गवर्नरों के विधानसभा भाषण को लेकर हुए विवादों पर राज्य सरकारों ने भी तीखी प्रतिक्रिया दी है।

पार्टी सूत्रों के अनुसार तमिलनाडु के गवर्नर आरएन रवि ने विधानसभा में कैबिनेट द्वारा तैयार भाषण पढ़ने से इनकार कर दिया, जबकि केरल के गवर्नर राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर और कर्नाटक के गवर्नर थावरचंद गहलोत पर भी कैबिनेट के भाषण को अधूरा पढ़ने के आरोप लगे हैं। कांग्रेस का कहना है कि यह आचरण संवैधानिक परंपराओं के खिलाफ है।

कांग्रेस के राज्यसभा सांसद सैयद नसीर हुसैन ने बीजेपी पर गवर्नर पद का राजनीतिक इस्तेमाल कर संघीय ढांचे को कमजोर करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 176 और 163 के तहत गवर्नर को चुनी हुई सरकार की सलाह पर काम करना होता है और कैबिनेट द्वारा तैयार भाषण को पूरा पढ़ना उनकी संवैधानिक जिम्मेदारी है।

कांग्रेस विदेश नीति के मोर्चे पर भी सरकार को घेरने की तैयारी में है। पार्टी चीन द्वारा भारतीय क्षेत्रों पर किए जा रहे दावों और पाकिस्तान से सीमा पार आतंकवाद के मुद्दे पर सरकार से जवाब मांग रही है। इसके अलावा, विपक्ष के नेता राहुल गांधी हाल ही में अमेरिकी टैरिफ बढ़ोतरी के बाद कपड़ा उद्योग पर पड़े असर, नौकरियों के नुकसान और फैक्ट्रियों के बंद होने का मुद्दा भी उठा चुके हैं।

पार्टी सूत्रों ने बताया कि बजट सत्र में कांग्रेस इंदौर में दूषित पानी से हुई मौतों, दिल्ली में गंभीर वायु प्रदूषण और उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद को निशाना बनाए जाने जैसे मुद्दों को भी उठाने पर विचार कर रही है। कांग्रेस बजट सत्र के दौरान समान विचारधारा वाली पार्टियों के साथ तालमेल बनाकर सरकार के खिलाफ साझा रणनीति अपनाने की कोशिश करेगी। सत्र की शुरुआत में I.N.D.I.A. ब्लॉक के सहयोगियों के साथ भी रणनीतिक बैठक की योजना है, जिसमें पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और राहुल गांधी अहम भूमिका निभाएंगे।