द फॉलोअप डेस्क
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के पर्यावरण संरक्षण गतिविधि की ओर से महाशिवरात्रि के पावन अवसर पर श्रद्धालुओं से पर्यावरण संरक्षण का संकल्प लेने की अपील की गई है। श्रद्धालुओं ,मंदिर समितियों और सामाजिक संगठनों से आग्रह किया गया है कि भगवान शिव प्रकृति के देवता माने जाते हैं, इसलिए उनकी पूजा करते समय पर्यावरण का विशेष ध्यान रखें। पर्यावरण संरक्षण गतिविधि झारखंड के प्रांत संयोजक सच्चिदानंद मिश्रा ने कहा है कि पूजा सामग्री लाने और प्रसाद बांटने में पालिथिन का उपयोग न करें। पालिथिन नालियों को जाम कर देती है और पशु-पक्षियों के लिए भी घातक साबित होती है। इसके स्थान पर कपड़े या जूट के थैले तथा कागज के पैकेट का उपयोग करना चाहिए।
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श्रद्धालुओं से अपील की गई है कि वे पूजा के बाद बचे फूल-मालाओं और अन्य जैविक सामग्री को इधर-उधर न फेंकें, बल्कि निर्धारित स्थान पर ही डालें। सभी लोगों के प्रयास से ही पर्यावरण का ध्यान रखा जा सकता है। उन्होंने मंदिर प्रबंध समिति से भी आग्रह किया है कि भगवान भोले पर चढ़े हुए पुष्प, बेलपत्र आदि को नालियों, तालाबों सहित इधर उधर नहीं डालते हुए या तो मिट्टी में समर्पित कर दें या इससे खाद या रंग बनाने वाले को दें। उन्होंने कहा कि इस पहल का उद्देश्य धार्मिक आस्था के साथ-साथ प्रकृति की रक्षा करना है, ताकि आने वाली पीढ़ियों को स्वच्छ और सुरक्षित वातावरण मिल सके।
