रांची
कांग्रेस ने सीएम हेमंत सोरेन को पत्र लिखकर राज्य में अनुसूचित जाति आयोग एवं स्वर्ण जाति कल्याण आयोग के गठन की मांग की है। कांग्रेस कमेटी की ओर से लिखे गये पत्र में कहा गया है कि राज्य में सामाजिक न्याय, समान अवसर एवं सभी वर्गों के संतुलित विकास के लिए इन आयोगों का गठन अत्यंत आवश्यक है। राज्य के विभिन्न वर्ग आज भी शिक्षा, रोजगार, आर्थिक विकास एवं सामाजिक सुरक्षा से जुड़ी अनेक समस्याओं का सामना कर रहे हैं। ऐसे में अलग-अलग आयोग बनाकर उनकी समस्याओं का समाधान अधिक प्रभावी तरीके से किया जा सकता है।

कमेटी के महासचिव बिनय सिन्हा "दीपू" की ओर से सीएम को लिखे गये पत्र में इन बिंदुओं पर है फोकस-
1. अनुसूचित जाति समाज के लोगों को शिक्षा एवं रोजगार में अब भी कई कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है।
2. गांव एवं दूरदराज क्षेत्रों में सरकारी योजनाओं का लाभ सही तरीके से नहीं पहुंच पाता।
3. सामाजिक भेदभाव एवं उत्पीड़न से संबंधित मामलों की निगरानी एवं त्वरित समाधान आवश्यक है।
4. SC युवाओं के लिए कौशल विकास एवं स्वरोजगार योजनाओं की जरूरत है।
5. छात्रवृत्ति, आवास, स्वास्थ्य एवं रोजगार योजनाओं की प्रभावी मॉनिटरिंग के लिए आयोग आवश्यक है।
6. SC महिलाओं के आर्थिक एवं सामाजिक सशक्तिकरण हेतु विशेष नीति बननी चाहिए।
7. अनुसूचित जाति समाज के लिए राज्य स्तर पर स्थायी शिकायत निवारण व्यवस्था जरूरी है।

स्वर्ण जाति कल्याण आयोग की आवश्यकता
1. आर्थिक रूप से कमजोर स्वर्ण समाज के अनेक परिवार सरकारी योजनाओं से वंचित रह जाते हैं।
2. गरीब सामान्य वर्ग के युवाओं को शिक्षा एवं प्रतियोगी परीक्षाओं में आर्थिक सहायता की आवश्यकता है।
3. बेरोजगारी एवं पलायन की समस्या स्वर्ण समाज के गरीब परिवारों को भी प्रभावित कर रही है।
4. आर्थिक रूप से कमजोर सामान्य वर्ग (EWS) के अधिकारों एवं योजनाओं की निगरानी हेतु आयोग जरूरी है।
5. गरीब स्वर्ण परिवारों की बेटियों की शिक्षा एवं विवाह सहायता के लिए विशेष योजना बनाई जानी चाहिए।
6. स्वरोजगार एवं टाइनी उद्योग से जोड़कर गरीब सामान्य वर्ग को आत्मनिर्भर बनाया जा सकता है।
7. समाज के सभी वर्गों में संतुलन एवं सामाजिक समरसता बनाए रखने हेतु आयोग महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

दोनों आयोगों के मुख्य कार्य
1. शिक्षा, रोजगार एवं सामाजिक सुरक्षा योजनाओं की निगरानी।
2. गरीब परिवारों के लिए स्वरोजगार एवं टाइनी उद्योग योजना बनाना।
3. महिलाओं एवं युवाओं को कौशल विकास प्रशिक्षण उपलब्ध कराना।
4. पलायन रोकने हेतु स्थानीय रोजगार नीति तैयार करना।
5. बड़े उद्योगपतियों एवं कंपनियों को राज्य में निवेश हेतु आमंत्रित कर स्थानीय उत्पादों की मार्केटिंग करवाना।
6. गांव स्तर पर माइक्रो उद्योग एवं महिला स्वयं सहायता समूहों को बढ़ावा देना।
7. सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन की समीक्षा एवं शिकायतों का समाधान करना।
