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इंसानियत की मिसाल बने विधायक अनूप सिंह, भटके व्यक्ति को परिवार से मिलवाया

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द फॉलोअप डेस्क
पिछले कुछ दिनों से बोकरो के फुसरो और उसके आसपास के इलाकों में एक अजीब-सी बेचैनी पसरी हुई थी। सड़कों पर, बाजारों के किनारे और सार्वजनिक जगहों पर एक व्यक्ति भटकता दिखाई देता था। बड़े-बड़े उलझे हुए बाल, बढ़ी हुई दाढ़ी, फटी-पुरानी हालत और आंखों में दर्द। लोग उससे डरते भी थे और उसे देखकर दया भी थे। उसकी मौजूदगी से जहां आम लोगों को थोड़ी परेशानी भी हो रही थी। धीरे-धीरे उसकी शिकायतें बेरमो विधायक अनूप सिंह तक पहुंचने लगीं। अनूप सिंह ने इसे गंभीरता से लिया।

उन्होंने अपने कार्यकर्ताओं के साथ मिलकर उस व्यक्ति को सम्मानपूर्वक अपने आवास पर बुलवाया। वहां पहुंचने के बाद ही यह साफ हो गया कि सामने दिख रही हालत उसकी असली पहचान नहीं हो सकती। अनूप सिंह समझ चुके थे कि गंदगी, डर और पागलपन के इस रूप के पीछे कोई कहानी छिपी है, कोई परिवार है, कोई अतीत है। उन्होंने बिना देर किए इंसानियत का रास्ता चुना। कार्यकर्ताओं के सहयोग से पहले उसके बाल और दाढ़ी साफ करवाई गई। उसे नहलाया गया, नए कपड़े और जूते पहनाए गए। जैसे-जैसे उसकी बाहरी सूरत बदल रही थी, वैसे-वैसे उसकी आंखों में भी हल्की-सी चमक लौटने लगी। टूटी-फूटी भाषा में वह अपने बारे में कुछ बताने की कोशिश करने लगा। कभी किसी गांव का नाम, कभी किसी बाजार का, तो कभी गया जिले के आसपास के इलाकों का जिक्र।

यहीं से विधायक अनूप सिंह की दरियादिली साफ नजर आती है। उन्होंने केवल मदद करके कर्तव्य पूरा नहीं माना, बल्कि उस व्यक्ति को उसके अपनों तक पहुंचाने का संकल्प लिया। गया जिले में अपने परिचितों और सहयोगियों से संपर्क किया गया। बेरमो से एक गाड़ी की व्यवस्था की गई और अपने कुछ भरोसेमंद सहयोगियों को उसके साथ भेजा गया। लगभग पांच घंटे तक गया में भटकते हुए, पूछताछ करते हुए, बाजार-दर-बाजार तलाश की गई। आखिरकार, एक बाजार में कुछ लोगों की नजर उस पर पड़ी और पहचान की एक डोर जुड़ गई।

इसके बाद जो हुआ, वह किसी भी संवेदनशील इंसान की आंखें नम कर देने वाला था। वह व्यक्ति अपने घर पहुंचा। वैसे तो अनूप सिंह का लोगों से जुड़ाव छिपा हुआ नहीं है। लेकिन इस पर यह अनूप सिंह के लिए कोई प्रचार का विषय नहीं था। यह उनके स्वभाव का सहज व्यवहार था। एक विधायक के तौर पर उनकी क्षेत्र की जनता पहले से ही उन्हें पसंद करती है, उनके कामों पर भरोसा करती है। लेकिन इस घटना ने लोगों के दिलों में उनके लिए सम्मान को और गहरा कर दिया। क्योंकि उन्होंने दिखा दिया कि राजनीति केवल भाषणों से नहीं होती, बल्कि जरूरत पड़ने पर किसी अनजान, बेसहारा इंसान का हाथ थामने का नाम भी राजनीति है।