द फॉलोअप डेस्क
झारखंड में नगर निकाय चुनाव को लेकर राजनीतिक हलचल तेज है। इसी बीच कोल्हान क्षेत्र के एकमात्र भाजपा विधायक और पूर्व मुख्यमंत्री चंपाई सोरेन पार्टी से नाराज नजर आ रहे हैं। वे संगठनात्मक बैठकों और चुनावी गतिविधियों से दूरी बनाए हुए हैं। चंपाई सोरेन ने आरोप लगाया है कि पार्टी की ओर से उन्हें बैठकों या रायशुमारी की कोई सूचना नहीं दी जाती। उनका कहना है कि जब बुनियादी जानकारी साझा नहीं की जाती, तो सक्रिय भूमिका निभाने का सवाल ही पैदा नहीं होता। उन्होंने इस घटनाक्रम के पीछे किसी प्रभावशाली व्यक्ति की भूमिका की संभावना का भी संकेत दिया। वहीं, आदित्यपुर नगर निगम चुनाव के प्रभारी शैलेंद्र सिंह ने इस आरोप को खारिज किया। उनका कहना है कि चंपाई अक्सर मोबाइल पास नहीं रखते या बंद रहता है। पीए चंचल गोस्वामी को सभी बैठकों और कार्यक्रमों की जानकारी दी जाती है, लेकिन चंपाई उनमें शामिल नहीं होते।

चंपाई सोरेन के कुछ सहयोगियों ने सवाल उठाया है कि क्या विधायक की अनुपस्थिति में उनके क्षेत्र में प्रत्याशी चयन की प्रक्रिया पूरी करना उचित है। उनका कहना है कि कोल्हान से भाजपा का सिर्फ एक ही विधायक है और उन्हें रायशुमारी में शामिल न करना संगठनात्मक संतुलन पर सवाल खड़ा करता है। पार्टी समर्थित प्रत्याशियों के पक्ष में प्रचार न करने के सवाल पर चंपाई ने स्पष्ट कहा कि जब रायशुमारी में उन्हें शामिल ही नहीं किया गया, तो बाद में प्रचार करने का कोई औचित्य नहीं बनता। शैलेंद्र सिंह ने दावा किया कि चंपाई चाहते थे कि किसी एक प्रत्याशी को पार्टी का समर्थन न दिया जाए, लेकिन पार्टी ने रायशुमारी के बाद सभी नगर निगम क्षेत्रों में प्रत्याशियों को आधिकारिक समर्थन देने का फैसला किया। राजनीतिक विवाद तब और गहरा गया जब आदित्यपुर नगर निगम और सरायकेला नगर पंचायत चुनाव में चंपाई सोरेन ने अपने समर्थकों को मैदान में खड़ा किया। आधिकारिक समर्थन के बावजूद उनके समर्थक उम्मीदवारों ने नामांकन वापस नहीं लिया।
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आदित्यपुर में चंपाई समर्थक सुनीता लियांगी और सरायकेला में पूर्व विधायक प्रतिनिधि सानंद आचार्या पार्टी समर्थित प्रत्याशी के खिलाफ चुनाव मैदान में बने हुए हैं।चंपाई सोरेन और शैलेंद्र सिंह के बयानों के बाद यह सवाल उठ रहा है कि क्या भाजपा के भीतर अंदरूनी राजनीति के कारण ‘कोल्हान टाइगर’ खुद को हाशिए पर महसूस कर रहे हैं, या यह रणनीतिक दबाव है ताकि वे पार्टी नेतृत्व से अधिक राजनीतिक स्पेस हासिल कर सकें। यह इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि चंपाई सोरेन को बड़े राजनीतिक संदेश के साथ भाजपा में शामिल किया गया था। उनके कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का बारिश के बावजूद रांची से जमशेदपुर सड़क मार्ग से पहुंचना इसी रणनीति का हिस्सा माना गया था। उस समय उन्हें कोल्हान में भाजपा का प्रमुख आदिवासी चेहरा बताया गया था। इस खबर के लिए इनपुट दैनिक भास्कर के विनय चतुर्वेदी की रिपोर्ट से ली गई है।