द फॉलोअप डेस्क
जमशेदपुर के बिष्टुपुर स्थित सबसे पॉश इलाके सीएच एरिया निवासी उद्यमी देवांग गांधी के पुत्र कैरव गांधी के लापता हुए चार दिन, यानी 96 घंटे बीत चुके हैं, लेकिन अबतक पुलिस को उनका कोई ठोस सुराग नहीं मिल पाया है। समय बीतने के साथ ही पुलिस की जांच का फोकस अब स्पष्ट रूप से अपहरण की आशंका की ओर बढ़ गया है। शुरुआती जांच और सामने आए तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर पुलिस को उनके अपहरण की आशंका है, हालांकि अभी तक आधिकारिक तौर पर इसकी पुष्टि नहीं की गई है। सूत्रों के अनुसार, जिस स्कॉर्पियो वाहन से कैरव को ले जाये जाने की बात सामने आ रही है, वह अबतक बरामद नहीं हो सका है। वाहन पर पुलिस का स्टीकर लगा होने की बात कही जा रही थी, लेकिन इसके पीछे किसका हाथ है, इसे लेकर स्थिति अब भी अस्पष्ट बनी हुई है। कैरव की तलाश और संभावित अपहरणकर्ताओं की गिरफ्तारी के लिए अलग-अलग राज्यों में लगातार छापेमारी की जा रही है। कैरव की तलाश में पुलिस ने उनके घर और आसपास के इलाकों में लगे सीसीटीवी कैमरों की गहन जांच की है। जांच के बाद सात संदिग्धों को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है। साथ ही, पुलिस इस पूरे मामले में अपहरणकर्ताओं के किसी स्थानीय संपर्क की भी पड़ताल कर रही है।

सीसीटीवी फुटेज से मिले अहम सुराग
जांच के दौरान यह तथ्य सामने आया है कि कथित स्कॉर्पियो वाहन शुक्रवार दोपहर करीब 1:29 बजे चांडिल के पाटा टोल प्लाजा से गुजरा था। इसके बाद रिवर व्यू होटल के पास लगे सीसीटीवी कैमरे में वही स्कॉर्पियो बिना पुलिस स्टीकर के दिखाई दी। पाटा टोल प्लाजा और रिवर व्यू होटल के बीच की दूरी महज दो किलोमीटर है, जिसे वाहन ने करीब 22 मिनट में तय किया। पुलिस को आशंका है कि इसी दौरान वाहन से पुलिस स्टीकर हटा दिया गया। पुलिस सूत्रों का मानना है कि इसके बाद अपहरणकर्ताओं ने रास्ता बदलते हुए पुरुलिया रोड पकड़ा और संभवतः कैरव को किसी अन्य वाहन में शिफ्ट कर दिया गया, जबकि स्कॉर्पियो पुरुलिया की ओर आगे बढ़ गई। पुरुलिया में मिले सीसीटीवी फुटेज में स्कॉर्पियो में केवल चालक के मौजूद होने की पुष्टि हुई है।

पुराने अपहरण गिरोहों की भी हो रही जांच
सूत्रों के अनुसार, इस मामले में बिहार के कुख्यात किडनैपर चंदन सोनार और उसके गिरोह की संलिप्तता की आशंका भी जताई जा रही है। चंदन सोनार 2025 में दीपावली से पहले हजारीबाग जेल से रिहा हुआ था। इस कड़ी में एसआईटी की टीम ने पटना, हाजीपुर और जहानाबाद में छापेमारी की, हालांकि अब तक कोई ठोस सफलता नहीं मिल सकी है।
पुलिस मुख्यालय के निर्देश पर जिला पुलिस पिछले दस वर्षों में अपहरण और फिरौती से जुड़े मामलों में सक्रिय रहे गिरोहों का डाटा खंगाल रही है। झारखंड के साथ-साथ बिहार, ओडिशा और पश्चिम बंगाल में सक्रिय गिरोहों के पैटर्न की भी जांच की जा रही है। कैरव की तलाश में पुलिस की टीमें इन राज्यों में भी भेजी गई हैं।

कौन है चंदन सोनार
हाजीपुर निवासी चंदन सोनार ‘किडनैपिंग किंग’ के नाम से कुख्यात रहा है। उस पर देश के 12 राज्यों में 40 से अधिक अपहरण के मामले दर्ज हैं। झारखंड में भी कई हाई-प्रोफाइल अपहरण मामलों में उसका नाम सामने आ चुका है। वर्ष 2023 में उसके दो सहयोगियों को रांची पुलिस ने गिरफ्तार किया था, जबकि गिरोह के अन्य सदस्य अब भी फरार बताए जा रहे हैं। फिलहाल, कैरव गांधी की सुरक्षित बरामदगी पुलिस के लिए सबसे बड़ी चुनौती बनी हुई है। जैसे-जैसे समय बीत रहा है, परिवार की चिंता और शहर की बेचैनी दोनों बढ़ती जा रही हैं।