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दुमका में आज झामुमो का झारखंड दिवस समारोह, मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन होंगे मुख्य अतिथि

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द फॉलोअप डेस्क
दुमका के गांधी मैदान में सोमवार, 02 फरवरी को झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) द्वारा झारखंड दिवस समारोह का आयोजन किया जाएगा। इस कार्यक्रम के मुख्य अतिथि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन होंगे। समारोह में राज्य सरकार के कई मंत्री, झामुमो के विधायक और सांसद भी शामिल होंगे। कार्यक्रम को लेकर पूरे दुमका शहर में झामुमो के बैनर और पोस्टर लगाए गए हैं, जिससे आयोजन की भव्यता साफ झलक रही है। रविवार की शाम दुमका के उपायुक्त अभिजीत सिन्हा और पुलिस अधीक्षक पीतांबर सिंह खेरवार ने गांधी मैदान पहुंचकर सुरक्षा और अन्य व्यवस्थाओं का जायजा लिया। एसपी पीतांबर सिंह खेरवार ने बताया कि कार्यक्रम में भारी भीड़ जुटने की संभावना है। इसे देखते हुए मुख्यालय से अतिरिक्त पुलिस बल मंगाया गया है। सुरक्षा व्यवस्था की जिम्मेदारी पांच डीएसपी सहित बड़ी संख्या में पुलिस पदाधिकारियों और जवानों को सौंपी गई है।


गौरतलब है कि झारखंड मुक्ति मोर्चा द्वारा प्रतिवर्ष 02 फरवरी को दुमका में इस विशेष समारोह का आयोजन किया जाता है, जिसे झारखंड दिवस के नाम से जाना जाता है। यह समारोह अपने स्वरूप में काफी अनोखा है। जहां आमतौर पर राजनीतिक कार्यक्रम दिन या शाम में आयोजित होते हैं, वहीं झामुमो का यह कार्यक्रम रात करीब 8 बजे शुरू होकर देर रात 2 से 3 बजे तक चलता है। फरवरी की ठंड के बावजूद हजारों की संख्या में महिला-पुरुष गांधी मैदान में डटे रहकर अपने नेताओं का संबोधन सुनते हैं, जो पार्टी के प्रति उनकी प्रतिबद्धता को दर्शाता है।


इस समारोह की शुरुआत 02 फरवरी 1978 को झामुमो के संस्थापक शिबू सोरेन ने की थी। संताल परगना के वरिष्ठ पत्रकार शिव शंकर चौधरी के अनुसार, गुरुजी ने दुमका और आसपास के लोगों को उनके अधिकारों के प्रति जागरूक करने और झारखंड को पृथक राज्य बनाने की मांग को लेकर लोगों को संगठित करने के उद्देश्य से इस कार्यक्रम की शुरुआत की थी। प्रारंभ में यह आयोजन दुमका के नेहरू पार्क में किया जाता था।समय के साथ इस समारोह में लोगों की भागीदारी बढ़ती गई और बाद में इसे गांधी मैदान में आयोजित किया जाने लगा। इसी मंच से शिबू सोरेन और पार्टी के अन्य नेता अपनी नीतियों, सिद्धांतों और भविष्य की योजनाओं की जानकारी लोगों को देते थे। शिबू सोरेन का संबोधन अक्सर आधी रात को होता था, जिसका लोग बेसब्री से इंतजार करते थे। उनके विचारों और संदेशों का प्रचार लोग गांव-गांव जाकर करते थे। धीरे-धीरे यह समारोह झारखंड पृथक राज्य आंदोलन की एक मजबूत धुरी बन गया, जिसका परिणाम वर्ष 2000 में झारखंड राज्य के गठन के रूप में सामने आया।


दुमका विधायक और शिबू सोरेन के छोटे पुत्र बसंत सोरेन ने भी इस समारोह के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि यह कार्यक्रम पार्टी के लिए बेहद अहम है। इसकी शुरुआत लोगों को जागरूक करने के उद्देश्य से की गई थी और आज भी पार्टी कार्यकर्ता पूरे उत्साह और समर्पण के साथ इसमें भाग लेते हैं।