द फॉलोअप डेस्क
धनबाद रिंग रोड निर्माण और भू-अर्जन मुआवजा वितरण में कथित अनियमितताओं को लेकर एंटी करप्शन ब्यूरो (एसीबी) ने बड़ी कार्रवाई की है। एसीबी ने झारखंड के पांच जिलों धनबाद, रांची, दुमका, गिरिडीह और देवघर में एक साथ छापेमारी करते हुए 17 लोगों को गिरफ्तार किया है। यह कार्रवाई गुरुवार रात शुरू होकर शुक्रवार सुबह तक चली, जिसमें एसीबी की कुल 10 टीमें शामिल रहीं और भारी संख्या में पुलिस बल की तैनाती की गई थी। गिरफ्तार किए गए लोगों में भू-राजस्व विभाग से जुड़े कर्मचारी और मुआवजा वितरण प्रक्रिया में भूमिका निभाने वाले बिचौलिये शामिल बताए जा रहे हैं। यह मामला समाजसेवी रमेश राही की शिकायत के आधार पर दर्ज किया गया था। प्रारंभिक जांच के दौरान इस भू-अर्जन घोटाले में कुल 34 लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई थी।

आरोप है कि रिंग रोड निर्माण के लिए अधिग्रहित की गई जमीनों से जुड़े अभिलेखों में नियमों को ताक पर रखकर बड़े पैमाने पर गड़बड़ियां की गईं और मुआवजा राशि का गलत तरीके से भुगतान किया गया। एसीबी सूत्रों के अनुसार, जांच अभी जारी है और आगे चलकर अन्य आरोपियों की गिरफ्तारी से भी इनकार नहीं किया जा सकता। समाजसेवी रमेश राही ने बताया कि उन्होंने इस घोटाले को वर्ष 2013 में ही उजागर किया था, जबकि मामले में एफआईआर वर्ष 2016 में दर्ज हुई। उन्होंने कहा कि जनता की सुविधा के लिए बनाए गए रिंग रोड के नाम पर जिन लोगों की जमीन ली गई, उनके मुआवजे में बड़े स्तर पर घोटाला किया गया।

रमेश राही का आरोप है कि भू-अर्जन अधिकारी, भू-अर्जन कार्यालय और अंचल कार्यालय से जुड़े अधिकारियों ने आपसी साठगांठ कर मुआवजा राशि की बंदरबांट की। उनके अनुसार यह घोटाला करीब 100 से 150 करोड़ रुपये से अधिक का है। उन्होंने इस कार्रवाई के लिए एसीबी का आभार जताते हुए सरकार से मांग की कि इस मामले में शामिल सभी दोषियों की संपत्ति जब्त की जाए, ताकि जिन गरीब किसानों और जमीन मालिकों का मुआवजा हड़प लिया गया है, वह राशि उन्हें वापस मिल सके।