द फॉलोअप डेस्क
आईआईएम रांची प्रबंधन शिक्षा को एक नया और रचनात्मक आयाम देने की दिशा में लगातार प्रयासरत है। इस दिशा में सिनेमा को एक प्रभावी शिक्षण माध्यम का रूप दिया जा रहा है। आईआईएम रांची ने सिनेमा को एक खास पाठ्यक्रम के रूप में तैयार किया है। जिसमे फिल्मों को केस स्टडी के रूप में उपयोग करते हुए नेतृत्व, सामाजिक विविधता, नैतिकता, रणनीति, नवाचार, जोखिम और उद्यमिता जैसे जटिल विषयों को समझने और समझाने का प्रयास किया जायेगा। इसके साथ ही प्रबन्धन शिक्षा के नजयारिये में फिल्मो के माध्यम से वैश्वीकरण, क्रॉस-कल्चरल मैनेजमेंट और संगठनात्मक परिवर्तन जैसे पहलुओं पर भी गहन चर्चा की जा रही है।
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इस विषय पर आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में डीन अकादमिक प्रो. तनुश्री दत्ता, लिबरल आर्ट्स विभाग के प्रो. विकास पाथे एवं प्रो. जॉर्ज जोसेफ, ओबीएचआर विभाग के प्रो. मनीष कुमार, प्रो. गौरव मराठे और सूचना प्रणाली एवं बिज़नेस एनालिटिक्स विभाग के प्रो. अंबुज आनंद ने अपनी बातें राखी। प्रो. विकास पाथे ने बताया कि इस पाठ्यक्रम को द्वितीय वर्ष के एमबीए छात्रों के लिए एक वैकल्पिक पाठ्यक्रम के रूप में शुरू किया गया है, जो आईआईएम प्रणाली में अपनी तरह का पहला प्रयास है। कुल 30 घंटे के इस पाठ्यक्रम में द्वितीय वर्ष के एमबीए छात्रों ने उत्साहपूर्वक रुचि दिखाई, जिसमें 150 से अधिक विद्यार्थी कक्षा में शामिल हो रहे हैं। कोर्स का मूल उद्देश्य "एंटरटेनमेंट टू एजुकेशन" है, जिसमें द्विभाषी (बाइलिंगुअल) फिल्मों को विजुअल लर्निंग के प्रभाव के रूप में समझाने का प्रयास जारी है, ताकि सीखने की प्रक्रिया अधिक प्रभावी और रोचक बन सके।

प्रो. मनीष कुमार ने कहा कि यह पाठ्यक्रम विशेष रूप से आज के जेन-ज़ी पीढ़ी को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है, जिन्हें लंबे समय तक किताबों से जोड़े रखना मुश्किल है। उनका ध्यान केंद्रित रखने के लिए उनकी रूचि आधारित शिक्षा पद्धति को अपनाना प्राध्यापको का काम है, ऐसे में फिल्मों और दृश्य कला के माध्यम के जरिए उन्हें पढ़ाने का यह प्रयास अधिक प्रभावी सिद्ध हो रहा है। कोर्स को डिजाईन करने में आईआईएम रांची के निदेशक प्रो. दीपक कुमार श्रीवास्तव ने हमें शिक्षण पद्धति को नये दृष्टिकोण से प्रयोग करने की पूरी आजादी दी।

वहीं, प्रो. अंबुज आनंद ने कहा कि कक्षा में फिल्म, उनके पात्र और परिवेश के माध्यम से छात्रों को नेतृत्व कौशल, सप्लाई चेन मैनेजमेंट, बातचीत, मोलभाव (नेगोशिएशन), परिस्थितियों को संभालने की क्षमता, मूल्य प्रणाली, निर्णय लेने की योग्यता और क्षमताओं के आकलन जैसे विषयों को अधिक व्यावहारिक और सहज तरीके से समझाया जा रहा है। इस पाठ्यक्रम को लेकर विद्यार्थियों से भी सकारात्मक प्रतिक्रिया मिल रही है।
पाठ्यक्रम के अंतर्गत भारतीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर की चयनित फिल्मों को शिक्षण का माध्यम बनाया गया है। जिससे छात्रों को फिल्म के जरिये सीखने का अनुभव मिल सके, इसमें सिद्धांत और व्यवहार के बीच बेहतर तालमेल को समझाने का प्रयास होगा। प्रत्येक सत्र में फिल्म प्रदर्शन के साथ संवादत्मक चर्चा की जा रही है।

जिससे छात्र वास्तविक जीवन की चुनौतियों और दुविधाओं का रचनात्मक और आलोचनात्मक विश्लेषण करना सिख रहे हैं।
इस पाठ्यक्रम में विभिन्न विषयों पर आधारित फिल्मों को शामिल किया गया है।
नेतृत्व और अधिकार की समझ के लिए 12 Angry Men और चक दे! इंडिया जैसी फिल्में है।
-विविधता और समावेशन जैसे विषयों को आर्टिकल 15 और सैराट के माध्यम से समझाया जा रहा है।
-रणनीति और प्रतिस्पर्धा जैसे विषय को समझाने के लिए द फाउंडर और गुरु जैसी फ़िल्में माध्यम बनी है।
-वैश्वीकरण और सांस्कृतिक विविधता को समझाने के लिए लॉस्ट इन ट्रांसलेशन और द लंचबॉक्स जैसी फ़िल्में है।
बातचीत और संघर्ष से प्रबंधन की समझ विकशित हो इसके लिए ब्रिज ऑफ स्पाइज और लगान।
वहीं, नवाचार और उद्यमिता जैसे विषयों के लिए जॉय और 3 इडियट्स का उदाहरण लिया गया है।
नैतिकता और सामाजिक जिम्मेदारी पर आधारित फ़िल्में जैसे एंथ्रोपोसीन: द ह्यूमन एपोक और मॉडर्न टाइम्स जैसी विचारोत्तेजक फिल्मों को संसाधन बनाया गया है।
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मीडिया और संचार की भूमिका को मद्रास कैफे और पेज 3 से समझाया जा रहा है।
जबकि संगठनात्मक संस्कृति और परिवर्तन को समझाने के लिए मनीबॉल और रॉकेट सिंहः सेल्समैन ऑफ द ईयर पर आधारित सत्र होंगे।
इन विविध फिल्मों से पाठ्यक्रम सामग्री तैयार कर प्रबंधन के सिद्धांतों को व्यवहारिक रूप में समझने का अवसर मिला है। जिससे छात्रों की सोच और सांस्कृतिक समझ को विकसित करने का प्रयास जरी है।
सिनेमा को शिक्षण माध्यम के रूप में अपनाकर आईआईएम रांची अनुभवात्मक शिक्षा में एक नया मानक स्थापित कर रहा है। यह पहल भावी प्रबंधकों में आलोचनात्मक सोच, नैतिक नेतृत्व और सांस्कृतिक संवेदनशीलता को बढ़ावा देगी। यह प्रयास संस्थान की नवाचारी शिक्षण पद्धति के प्रति प्रतिबद्धता और प्रबंधन शिक्षा को अधिक प्रभावशाली, रोचक और परिवर्तनकारी बनाने के उसके दृष्टिकोण को दर्शाता है।