द फॉलोअप, रांची
एक वंचित परिवार को न्याय दिलाने की दिशा में महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए झारखंड उच्च न्यायालय, रांची ने एक मृत भारी वाहन चालक के परिवार को दिए गए मुआवज़े को ₹5,76,000 से बढ़ाकर ₹18,30,000 (तथा इसके अतिरिक्त 6% वार्षिक साधारण ब्याज) कर दिया। यह वृद्धि मूल मुआवज़े की लगभग 3.18 गुना (317.7%) है।

फैसले की प्रमुख बातें
12 वर्षों की कानूनी यात्रा का समापन: वर्ष 2014 में दायर अपील का अंतिम रूप से निस्तारण माननीय मुख्य न्यायाधीश श्री एम. एस. सोनक द्वारा दिनांक 28.08.2026 को किया गया। M.A. No. 21 of 2014 में न्यायालय ने स्पष्ट किया कि भारी वाहन चलाना एक कुशल (Skilled) कार्य है और किसी भारी वाहन के चालक को अर्ध-कुशल (Semi-skilled) श्रमिक नहीं माना जा सकता।
ट्रिब्यूनल के आदेश में संशोधन
MACT, पाकुड़ द्वारा वर्ष 2012 में मृतक चालक जहांगीर खान की आय ₹4,500 प्रति माह निर्धारित की गई थी। उच्च न्यायालय ने आय को पुनः निर्धारित करते हुए ₹10,000 प्रति माह माना तथा उसमें 40% भविष्य की संभावनाएँ (Future Prospects) जोड़ते हुए कुल मुआवज़ा ₹18,30,000 निर्धारित किया। मुख्य न्यायाधीश ने Amicus Curiae अधिवक्ता अनिकेत कुमार ओझा द्वारा की गई योग्य सहायता के लिए उच्च न्यायालय की ओर से विशेष रूप से सराहना दर्ज की। न्यायालय ने यह अंकित किया कि उन्होंने अपीलकर्ताओं का पक्ष अत्यंत निपुणतापूर्वक प्रस्तुत किया। न्यायालय द्वारा व्यक्त इस आभार के अतिरिक्त JHALSA को निर्देश दिया गया कि वह पैनल अधिवक्ताओं की अनुसूची के अनुसार ओझा को उनकी निर्धारित फीस का भुगतान करे।
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बीमा कंपनी को कड़ा निर्देश एवं ब्याज की गणना
National Insurance Company Ltd. को स्पष्ट आदेश दिया गया है कि वह ₹18,30,000 की संपूर्ण बढ़ी हुई राशि 6% वार्षिक साधारण ब्याज के साथ छह सप्ताह के भीतर उच्च न्यायालय में जमा करे। यह ब्याज दावा याचिका दायर करने की तिथि 07.01.2012 से राशि की वास्तविक वसूली/भुगतान तक देय होगा। अपील दायर करने में हुए 388 दिनों के विलंब के कारण, न्यायालय ने बीमा कंपनी को लगभग 1 वर्ष की इस विलंब अवधि का ब्याज भुगतान करने से छूट प्रदान की है। उच्च न्यायालय ने Amicus Curiae, JHALSA एवं DLSA, Sahibganj को निर्देश दिया कि वे दावेदार परिवार से व्यक्तिगत संपर्क कर उन्हें मुआवज़ा प्राप्त करने में पूर्ण सहायता प्रदान करें, ताकि राशि सीधे दावेदारों के बैंक खाते में ही ट्रांसफर हो सके और किसी भी प्रकार का शोषण न हो।
