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नियमों को ताक पर रख विश्वविद्यालय को दान में दी गई जमीन, 6.82 एकड़ के दानपत्र की जांच की मांग

नियमों को ताक पर रख विश्वविद्यालय को दान में दी गई जमीन, 6.82 एकड़ के दानपत्र की जांच की मांग

हजारीबाग: 
Hazaribagh News:
हजारीबाग में सरकारी जमीन पर कब्जे और कथित फर्जी दस्तावेजों के सहारे जमीन की खरीद-बिक्री के आरोपों के बीच हजारीबाग में एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने प्रशासनिक व्यवस्था और सरकारी भूमि अभिलेखों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। सवाल यह है कि जिस जमीन को सरकारी होने और बिहार भूमि सुधार अधिनियम (BLR Act) 1950 की धारा 4(H) के दायरे में होने का दावा किया जा रहा है, उसी जमीन के 6.82 एकड़ हिस्से का दानपत्र आखिर कैसे निबंधित हुआ?

राजमहल से जुड़ी जमीन का विश्वविद्यालय को दान
मामला पदमा अंचल स्थित राजमहल और उससे जुड़ी जमीन का है। पूर्व विधायक सौरभ नारायण सिंह की ओर से कुल 6.82 एकड़ भूमि विनोबा भावे विश्वविद्यालय को दान किए जाने के लिए झारखंड के राज्यपाल के नाम दानपत्र का निबंधन कराया गया है। हालांकि, अब इस दानपत्र की वैधता और जमीन के वास्तविक स्वामित्व को लेकर सवाल उठने लगे हैं।

62.75 एकड़ जमीन पर पहले से 4(H) का मामला
उपलब्ध दस्तावेजों के अनुसार, पदमा अंचल के थाना संख्या 27, खाता संख्या 746 के अंतर्गत कुल 62.75 एकड़ भूमि दर्ज है। इस जमीन को लेकर पहले ही प्रशासनिक स्तर पर कार्रवाई की जा चुकी है। हजारीबाग के तत्कालीन अपर समाहर्ता ने पत्रांक 3670/रा०, दिनांक 01.10.2022 के माध्यम से उक्त भूमि के विभिन्न प्लॉटों की खरीद-बिक्री पर रोक लगाने का आदेश जारी किया था। इसके लिए BLR Act 1950 की धारा 4(H) को आधार बताया गया था।

अंचल अधिकारी की रिपोर्ट में भी जमीन 4(H) के दायरे में
पदमा के तत्कालीन अंचल अधिकारी ने पत्रांक 324, दिनांक 28.05.2017 को अपनी रिपोर्ट में खाता संख्या 746 की पूरी 62.75 एकड़ भूमि को 4(H) के दायरे में बताया था। इस रिपोर्ट के साथ पंजी-2, अंचल अमीन का प्रतिवेदन, 4(H) से संबंधित इंडेक्स और वाद संख्या 14/1953-54 में पारित आदेश की प्रतियां भी संलग्न होने की बात कही गई है। ऐसे में सवाल उठता है कि जब सरकारी अभिलेखों में पूरी जमीन को 4(H) के दायरे में बताया गया था और उसकी खरीद-बिक्री पर रोक लगाने का आदेश भी जारी था, तो फिर 6.82 एकड़ जमीन का दानपत्र किस आधार पर निबंधित हुआ?

डीसी से शिकायत, अपर समाहर्ता को जांच की जिम्मेदारी
मामले की गंभीरता को देखते हुए सामाजिक कार्यकर्ता मनोज गुप्ता और आरटीआई एक्टिविस्ट राजेश मिश्रा ने हजारीबाग के उपायुक्त को लिखित आवेदन देकर पूरे प्रकरण की जानकारी दी है। आवेदन के साथ जमीन से जुड़े सरकारी पत्रों, रिपोर्टों और अन्य दस्तावेजों की प्रतियां भी उपलब्ध कराई गई हैं। मामले की जानकारी मिलने के बाद उपायुक्त ने त्वरित कार्रवाई करते हुए आवेदन को संबंधित दस्तावेजों के साथ अपर समाहर्ता, हजारीबाग के पास अग्रसारित कर दिया है। अब पूरे प्रकरण की गहन छानबीन और जांच की जानी है।

सरकारी रिकॉर्ड में जमीन 4(H) के दायरे में, फिर दान का अधिकार किसे?
इस पूरे मामले में प्रशासन के सामने कई महत्वपूर्ण सवाल हैं। जब सरकारी रिकॉर्ड में 62.75 एकड़ जमीन को 4(H) के दायरे में बताया गया था और जमीन की खरीद-बिक्री पर रोक लगाने का आदेश भी जारी हुआ था, तो फिर उसी खाता संख्या की जमीन के 6.82 एकड़ हिस्से का दानपत्र आखिर किस कानूनी आधार पर निबंधित हुआ?इसी खाता संख्या की जमीन पर सरकारी प्रशिक्षण केंद्र संचालित होने की बात भी सामने आ रही है। ऐसे में यह सवाल भी उठता है कि क्या जमीन के स्वामित्व का सत्यापन किए बिना ही दान की प्रक्रिया पूरी कर दी गई? क्या अंचल कार्यालय के रिकॉर्ड और निबंधन कार्यालय के दस्तावेजों में कोई विरोधाभास है?

विश्वविद्यालय को जमीन देने के नाम पर सरकारी भूमि के स्वामित्व का खेल?
अब निगाहें अपर समाहर्ता की जांच पर टिकी हैं। जांच में यह स्पष्ट होना चाहिए कि जमीन का वास्तविक स्वामित्व किसके पास है, दानपत्र किस अधिकार के आधार पर निबंधित हुआ और इस पूरी प्रक्रिया में कहीं सरकारी नियमों की अनदेखी तो नहीं की गई। जांच के निष्कर्ष से ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि जमीन के दान और उसके निबंधन की प्रक्रिया में नियमों का पालन हुआ है या नहीं।

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