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गुमला सदर अस्पताल की 'सांसें' रांची के भरोसे, महीनों से बंद ब्लड बैंक ने बढ़ाया मौत का खतरा

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गुमला 
कहने को तो गुमला सदर अस्पताल में रोजाना दर्जनों मरीज भर्ती होते हैं, लेकिन इमरजेंसी की स्थिति में यहाँ की सांसें 'रांची' के भरोसे टिकी हैं। जिले का इकलौता ब्लड बैंक महीनों से बंद पड़ा है, जिससे मरीजों के सामने जीवन-मरण का संकट खड़ा हो गया है। गुमला सदर अस्पताल में इन दिनों मरीजों को ब्लड नहीं मिलने के कारण भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। दरअसल, कुछ समय पहले गुमला जिले में संचालित ब्लड बैंक की मान्यता कुछ कमियों के कारण रद्द कर दी गई थी। इसके बाद से गुमला का ब्लड बैंक कई महीनों से बंद पड़ा है। ब्लड बैंक बंद होने के कारण अब मरीज पूरी तरह रांची से आने वाले ब्लड पर निर्भर हो गए हैं। सदर अस्पताल में प्रतिदिन कई मरीज भर्ती होते हैं और उनके परिजन ब्लड डोनेट भी करते हैं, लेकिन बावजूद इसके समय पर ब्लड उपलब्ध नहीं हो पा रहा है। मरीजों का आरोप है कि लगातार शिकायत करने के बाद भी उन्हें ब्लड नहीं दिया जा रहा और इलाज के लिए रांची जाने की सलाह दी जाती है, जिससे उनकी परेशानी और बढ़ जाती है।
ब्लड की किल्लत से मरीज परेशान, व्यवस्था पर उठे सवाल
इसी समस्या को लेकर सामाजिक कार्यकर्ता देवकी देवी सदर अस्पताल पहुंचीं। उन्होंने वहां देखा कि कई मरीजों को ब्लड की सख्त जरूरत है, लेकिन ब्लड उपलब्ध नहीं होने के कारण उन्हें कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने जिला प्रशासन, अस्पताल प्रबंधन और राज्य सरकार से मांग की है कि इस समस्या का जल्द समाधान किया जाए ताकि मरीजों को राहत मिल सके। अगर पूरे मामले को देखा जाए तो इसमें राज्य और केंद्र सरकार दोनों की जिम्मेदारी सामने आती है। स्थानीय लोगों का कहना है कि पहले गुमला में ब्लड बैंक सुचारु रूप से संचालित हो रहा था और किसी प्रकार की बड़ी समस्या सामने नहीं आती थी। लेकिन चाईबासा में एक मामला सामने आने के बाद गुमला सहित राज्य के कई ब्लड बैंकों को मानकों की कमी के कारण बंद कर दिया गया। इसका सीधा असर मरीजों पर पड़ रहा है।
लोगों को किन चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है?
खासतौर पर गुमला सदर अस्पताल में इलाज के लिए आने वाले अधिकांश मरीज सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था पर निर्भर रहते हैं। ऐसे में यदि अस्पताल में जरूरी सुविधाएं, खासकर ब्लड की उपलब्धता नहीं होगी, तो मरीजों के लिए यह बड़ी चुनौती बन जाती है। मरीजों का कहना है कि इलाज के लिए रांची जाना आर्थिक और शारीरिक रूप से बेहद कठिन है। उनका मानना है कि यदि गुमला में ही ब्लड की समुचित व्यवस्था हो जाए तो उन्हें इतनी परेशानियों का सामना नहीं करना पड़ेगा। वहीं, अस्पताल प्रबंधन का कहना है कि ब्लड की नियमित व्यवस्था सुनिश्चित करने और ब्लड बैंक की मान्यता दोबारा बहाल कराने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। हालांकि, फिलहाल ब्लड बैंक चालू नहीं होने के कारण मरीजों को दिक्कतें हो रही हैं। प्रबंधन के अनुसार रांची से ब्लड मंगाकर मरीजों को उपलब्ध कराया जाता है, लेकिन इसमें समय लगना स्वाभाविक है, जिससे मरीजों की परेशानी बढ़ जाती है।

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