द फॉलोअप डेस्क
सभी भाषा-संस्कृति की अपनी अलग अहमियत है। इससे उस भाषा से जुड़े समुदाय को अलग पहचान मिलती है। ये बातें मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने रविवार को डॉ. रामदयाल मुंडा स्टेडियम, रांची में आयोजित तीन दिवसीय बांग्ला सांस्कृतिक मेला के समापन समारोह में कही। उन्होंने कहा कि इसे संरक्षित और आगे बढ़ाना हम सभी की जिम्मेवारी है। भाषा की पकड़ जितनी मजबूत होगी, उतना ही मजबूत हमारा समाज और राज्य होगा। हर किसी को अपनी भाषा और संस्कृति पर गर्व होना चाहिए। सीएम ने कहा कि झारखंड की जो संरचना है, उसने अलग-अलग भाषा और संस्कृति का व्यापक प्रभाव है। हमारी सरकार भाषा और संस्कृति के साथ राज्य को आगे ले जाने का लगातार प्रयास कर रही है। यहां रहने वाले सभी समाज को मान-सम्मान के साथ जीने का मौका मिले इसके लिए सरकार प्रतिबद्ध है।

बांग्ला भाषा का झारखंड में है विशेष प्रभाव
झारखंड का जो भौगोलिक परिवेश है उसको लेकर सीएम ने कहा कि उसमें कमोबेश सभी जिले की सीमा किसी ना किसी राज्य के साथ जुड़ी हुई है। सीएम ने कहा कि विशेष कर पश्चिम बंगाल के साथ झारखंड के सबसे ज्यादा जिले जुड़े हुए हैं। ऐसे में बांग्ला भाषा और संस्कृति का यहां प्रभाव पड़ना लाजमी है। उन्होंने कहा कि यहां ऐसे कई लोग हैं जिनकी संपत्ति झारखंड और बंगाल दोनों राज्यों में है। सबसे बड़ी बात की बंगाल से उड़ीसा और बिहार राज्य बना। इसके बाद बिहार से झारखंड अलग राज्य बना। ऐसे में किसी ना किसी रूप में बांग्ला भाषा- संस्कृति यहां की धरती में रची बसी है। मतलब बिना बांग्ला के झारखंड के सांस्कृतिक विकास की कल्पना नहीं की जा सकती है।

10 से ज्यादा स्थानीय-क्षेत्रीय भाषाएं बोली जाती हैं
झारखंड में 10 से ज्यादा स्थानीय और क्षेत्रीय भाषाएं बोली जाती है। इस संबंध में सीएम ने कहा कि यहां के ग्रामीण परिवेश में हिंदी से ज्यादा क्षेत्रीय भाषाएं बोली जाती है। ऐसे में राज्य के विकास में अहम जिम्मेदारी निभाने वाले हमारे अधिकारी अगर स्थानीय और क्षेत्रीय भाषाओं को नहीं समझेंगे, नहीं सीखेंगे और नहीं जानेंगे तो वे स्थानीय लोगों से कैसे संवाद स्थापित कर पाएंगे। इसलिए हमने अपने अधिकारियों को कम से कम क्षेत्रीय भाषाओं को समझने और जानने को कहा है, ताकि वे ग्रास रूट पर लोगों के साथ सीधा संवाद कर उन्हें विकास योजनाओं का लाभ दे सकें।

विविधता में एकता ही हमारे देश की पहचान
भारत विभिन्न धर्म- समुदाय, भाषा, संस्कृति, रहन- सहन और वेशभूषा वाला देश है। यही विविधता में एकता हमारी देश की पहचान है। यह हमारे देश को मजबूती देती है और पूरी दुनिया इसका लोहा मानती है। कार्यक्रम के दौरान मंत्री आलमगीर आलम, सुप्रियो भट्टाचार्य, रांची के डीसी-एसएसपी के अलावा बड़ी संख्या में बांग्ला समुदाय के लोग मौजूद थे।

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