द फॉलोअप, रांची
प्रतिपक्ष के नेता बाबूलाल मरांडी ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट कर लिखा है कि पिछले वर्ष ही 108 एंबुलेंस सेवा को लेकर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन का ध्यान कराया था। 108 एम्बुलेंस सेवा का संचालन सम्मान फाउंडेशन को सौंपने के पीछे तुष्टिकरण, कमीशनखोरी और अनियमितताओं की आशंका है। स्वास्थ्य मंत्री, स्वास्थ्य सचिव तथा नोडल एजेंसी की भूमिका शुरू से ही संदेह के घेरे में रही है। कर्मचारियों के वेतन भुगतान में लापरवाही, उनके आर्थिक शोषण, फर्जी बिलिंग तथा अन्य वित्तीय अनियमितताओं की शिकायतें लगातार सामने आती रही हैं।

अब जबकि CAG की रिपोर्ट में स्वास्थ्य विभाग और 108 एम्बुलेंस सेवा से जुड़े करोड़ों रुपये के वित्तीय अनियमितताओं का खुलासा हुआ है, तब स्वास्थ्य विभाग केवल इकरारनामा रद्द करने जैसी कार्रवाई कर सरकार अपनी जवाबदेही से बच नहीं सकती। यह कदम जनता की आंखों में धूल झोंकने और वास्तविक दोषियों को बचाने का प्रयास प्रतीत होता है। इसी भ्रष्टाचार और कुप्रबंधन का परिणाम था कि झारखंड के कई इलाकों में मरीजों को खटिया, ठेला और निजी वाहनों के सहारे अस्पताल पहुंचने के लिए मजबूर होना पड़ा। प्रदेश की जनता, सामाजिक संगठनों और सशक्त विपक्ष के रूप में भाजपा ने बार-बार एम्बुलेंस सेवा सुधारने को लेकर आवाज उठाई, लेकिन स्वास्थ्य विभाग ने कोई ठोस कदम नहीं उठाया। अब जब पूरे मामले में भ्रष्टाचार की परतें खुल रही हैं, तो केवल दिखावटी कार्रवाई पर्याप्त नहीं है।

स्वास्थ्य मंत्री इरफान अंसारी, स्वास्थ्य सचिव अजय सिंह तथा इस पूरे प्रकरण से जुड़े सभी जिम्मेदार अधिकारियों के भूमिका की निष्पक्ष जांच कर CAG रिपोर्ट के आधार पर प्राथमिकी दर्ज की जाए। साथ ही इनके कार्यकाल में हुए सभी टेंडरों, नियुक्तियों और वित्तीय निर्णयों की स्वतंत्र जांच कराते हुए पूरे मामले की CBI जांच की अनुशंसा की जाए, ताकि झारखंड की जनता को सच्चाई पता चल सके और दोषियों को कानून के अनुसार दंड मिल सके।
