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दावोस यात्रा पर BJP में दो राय- जयंत सिन्हा को दिखा निवेश का भविष्य, बाबूलाल मरांडी बोले- विदेशी सैर

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द फॉलोअप डेस्क
ये तस्वीर देखिए। एक तरफ मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन हैं दूसरी तरफ नरेंद्र मोदी कैबिनेट का हिस्सा  रह चुके पूर्व केंद्रीय मंत्री जयंत सिन्हा. जयंत सिन्हा दावोस में झारखंड के विकास और निवेश की संभावनाओं पर दिलचस्पी दिखा रहे हैं। अब नजरें घुमाइए, और देखिए कि राजनीति के कितने रंग हैं। भाजपा नेता और नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी की जुबान में इस दावोस यात्रा को लेकर आलोचना है। उनका कहना है कि हेमंत सोरेन केवल सैर-सपाटे के लिए विदेश गए हैं। उनके अनुसार, जनता का पैसा विदेश में उड़ाया जा रहा है. मतलब दावोस को लेकर मुख्य विपक्षी पार्टी में अलग अलग राय. एक ही पार्टी के लोग एक ही समय में दो अलग-अलग बातें कह रहे हैं। एक  सकारात्मकता देख रहे हैं, और दूसरी तरफ आलोचना है। सोशल मीडिया पर जयंत सिन्हा कह रहे हैं कि दावोस में विश्व आर्थिक मंच के दौरान उन्होंने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से मुलाक़ात की। यह मुलाक़ात सिर्फ़ औपचारिकता नहीं थी, बल्कि झारखंड के आर्थिक विकास, निवेश आकर्षण और राज्य को देश और दुनिया के सामने सशक्त, विश्वसनीय और प्रतिस्पर्धी निवेश गंतव्य के रूप में स्थापित करने की सार्थक बातचीत थी। निवेश की संभावनाओं पर विस्तार से विचार हुआ।

सोचिए जरा एक ही राजनीतिक दल के लोग एक तरफ आरोप लगाते हैं कि सब व्यर्थ है, और दूसरी तरफ उनके ही नेता चर्चा कर रहे हैं कि दावोस जैसे वैश्विक मंच पर झारखंड की सक्रिय उपस्थिति एक स्पष्ट संकेत है कि राज्य विकास और निवेश की ओर पूर्ण रूप से अग्रसर है। जयंत सिन्हा ने कहा कि वैश्विक स्तर पर जो चर्चा हुई, उसमें जलवायु परिवर्तन और ग्रीन इन्वेस्टमेंट को भी प्रमुखता दी गई। दुनिया जानती है कि पर्यावरणीय जिम्मेदारी के बिना कोई भी विकास टिकाऊ नहीं हो सकता। उन्होंने यह भी लिखा कि झारखंड और भारत में विदेशी निवेश बढ़ाने से पर्यावरण के अनुकूल तकनीक, स्वच्छ ऊर्जा और सतत विकास को गति दी जा सकती है। पूरे राज्य के लोगों के लिए यह अत्यंत महत्वपूर्ण है, क्योंकि वैश्विक निवेश का सीधा लाभ ज़मीन पर दिखाई देता है। अब जनता में भ्रम की स्थिति तो पैदा होगी ना। जनता सोचने लगी है कि क्या सच में झारखंड का भविष्य चमक रहा है या फिर यह केवल विदेश सैर का भ्रम है? हेमंत सोरेन कह रहे हैं कि झारखंड अब केवल संभावनाओं की भूमि नहीं है, बल्कि विकास और निवेश की ओर पूरी तरह अग्रसर है। वहीं बाबूलाल मरांडी लगातार इस बात को खारिज कर रहे हैं। शायद यही राजनीति है। अब जनता को तय करना है कि वे किसकी बात सुनें जयंत सिन्हा की या बाबूलाल मरांडी की। बहरहाल हेमंत सोरेन ने यह साफ़ कर दिया कि झारखंड अब चुपचाप देखने वाला राज्य नहीं है, बल्कि दुनिया के सामने अपनी ताकत और संभावनाओं को पेश करने वाला राज्य है।