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पुलिस हिरासत में मौत का मामला : पूर्व सीएम अर्जुन मुंडा ने मानवाधिकार आयोग से की न्यायिक जांच की मांग

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रांची 
झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा ने जमशेदपुर के मानगो क्षेत्र में पुलिस अभिरक्षा में हुई अजीत महतो की मौत को गंभीर मानवाधिकार उल्लंघन बताते हुए राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग से स्वतंत्र और न्यायिक जांच की मांग की है। उन्होंने इस संबंध में आयोग के अध्यक्ष को पत्र लिखकर पूरे मामले पर स्वतः संज्ञान लेने का आग्रह किया है।
अर्जुन मुंडा ने कहा कि 30 दिसंबर 2025 को गोकुल नगर बस्ती निवासी अजीत महतो की पुलिस हिरासत में हुई मृत्यु संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत जीवन और गरिमा के अधिकार का गंभीर उल्लंघन प्रतीत होती है। उन्होंने आरोप लगाया कि बिना किसी स्वतंत्र जांच के सिर्फ अप्राकृतिक मृत्यु का मामला दर्ज कर परिजनों से सादे कागज पर हस्ताक्षर कराए गए और दो लाख रुपये की राशि दे दी गई, जिसकी वैधानिक प्रक्रिया स्पष्ट नहीं है।


पूर्व मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि गिरफ्तारी के बाद लगभग दो दिनों तक परिजनों को अजीत महतो से मिलने की अनुमति नहीं दी गई, जिससे पुलिस यातना की आशंका और गहरी होती है। इसी दौरान मृतक की गर्भवती पत्नी ने एक नवजात बच्ची को जन्म दिया। अजीत महतो परिवार के एकमात्र कमाऊ सदस्य थे, ऐसे में पूरा परिवार गहरे सामाजिक, आर्थिक और मानसिक संकट में आ गया है।
अर्जुन मुंडा ने आयोग से मांग की है कि इस मामले में दोषी पुलिसकर्मियों और अधिकारियों के खिलाफ सख्त कानूनी और विभागीय कार्रवाई की जाए। साथ ही मृतक के परिजनों को सम्मानजनक मुआवजा, पुनर्वास और आवश्यक सुरक्षा उपलब्ध कराई जाए। उन्होंने भरोसा जताया कि राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग इस संवेदनशील मामले में शीघ्र हस्तक्षेप कर पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने की दिशा में ठोस कदम उठाएगा।


 

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