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अंश-अंशिका की बरामदगी के बाद खुला बाल तस्करी का खौफनाक जाल, 50 बच्चे आज़ाद, कई राज्यों तक फैला है गिरोह

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द फॉलोअप डेस्क
रांची के धुर्वा इलाके से मासूम अंश और अंशिका की सकुशल बरामदगी के बाद पुलिस एक्टिव हो गई है। 14 जनवरी के बाद से शहर और आसपास के इलाकों में लगातार छापेमारी चल रही है। हर दिन कोई नया मोड़, कोई नई परत खुलती जा रही है। इसी सिलसिले में रांची पुलिस की एसआईटी ने अलग-अलग ठिकानों पर दबिश देकर कुल 50 बच्चों को बरामद किया है। ये बच्चे बाल तस्करी के आरोपियों और उनसे जुड़े लोगों के पास से मिले हैं। सोमवार को इन सभी बच्चों को CWC के सामने पेश किया गया। इन 50 बच्चों में से 12 बच्चे ऐसे हैं, जिन्हें पुलिस एक दिन पहले ही तस्करों के चंगुल से आज़ाद करा चुकी थी। शुरुआती जांच में सामने आया है कि इन बच्चों का अपहरण बाल तस्करी के इरादे से किया गया था। लेकिन बाकी 38 बच्चे कौन हैं, किसके हैं और क्या उन्हें भी तस्करी के लिए रखा गया था..यह अब भी रहस्य बना हुआ है। पुलिस की जांच जारी है और पूरी पड़ताल के बाद ही साफ हो पाएगा कि कौन बच्चा अपराध का शिकार है और कौन नहीं। इस पूरे मामले की जड़ें दो जनवरी से जुड़ी हैं, जब अंश और अंशिका के अपहरण का मामला सामने आया था। इसके बाद 17 जनवरी को धुर्वा थाना में 13 बाल तस्करों और 12 बरामद बच्चों को लेकर प्राथमिकी दर्ज की गई। तभी से रांची पुलिस की एसआईटी लगातार इस खतरनाक नेटवर्क की परतें उधेड़ रही है।

जांच में पता चला है कि इस पूरे गिरोह का सरगना रामगढ़ जिले के कोठार गांव का विरोधी खेरवार है। उसके साथ कोठार का ही एंथोनी खरवार और सिल्ली के टुटकी नवाडीह का आशिक गोप जैसे कई अहम चेहरे जुड़े हुए हैं। पुलिस अब इन सभी को रिमांड पर लेकर पूछताछ की तैयारी में है, ताकि पूरे नेटवर्क का नक्शा सामने आ सके। जिन 12 बच्चों के बारे में यह साफ हो चुका है कि उन्हें तस्करी के मकसद से अगवा किया गया था, उनके माता-पिता की तलाश में पुलिस दिन-रात जुटी हुई है। माता-पिता की पहचान और सत्यापन के बाद बच्चों का डीएनए टेस्ट कराया जाएगा और फिर उन्हें उनके असली परिवार के हवाले किया जाएगा। ये बच्चे रांची के सिल्ली, रामगढ़ के कोठार और लातेहार के बारियातू इलाके से बरामद किए गए हैं। इस मामले में गिरफ्तार आरोपियों की संख्या अब 15 तक पहुंच चुकी है। इनमें एक नाम राज रवानी का भी है, जो लातेहार जिले के शिव टोला, बारियातू का रहने वाला है। पुलिस पूछताछ में उसने दावा किया है कि उसके 14 बच्चे हैं और उसने दो शादियां की हैं। पुलिस इस दावे की भी गहन जांच कर रही है। रविवार को भी पुलिस ने इस गिरोह के 13 आरोपियों को दबोच लिया था और 12 और बच्चों को उनके कब्जे से मुक्त कराया था।

अब तक इस पूरे नेटवर्क से 9 पुरुष और 6 महिलाओं की गिरफ्तारी हो चुकी है। इनमें 12 लोग सीधे तौर पर बच्चों का अपहरण करने वाले हैं, जबकि तीन ऐसे हैं जो बच्चों को खरीदने का काम करते थे। रांची के एसएसपी राकेश रंजन के मुताबिक यह गिरोह किसी खानाबदोश गिरोह की तरह काम करता है। मौका मिलते ही बच्चों को उठा लेता है। इनका मुख्य निशाना झोपड़पट्टियों में रहने वाले, कूड़ा चुनने वाले और बेहद गरीब परिवारों के बच्चे होते हैं, जिनकी तलाश में कोई जल्दी सामने नहीं आता। अगर तुरंत कोई खरीदार नहीं मिलता, तो ये लोग बच्चों को एक-दो साल तक अपने पास रखते हैं और उन्हें अपना बच्चा बताकर रखते हैं। बाद में उन्हीं बच्चों से चोरी, पॉकेटमारी और दूसरे गैरकानूनी काम करवाए जाते हैं। यह गिरोह सिर्फ झारखंड तक सीमित नहीं है, बल्कि ओडिशा, उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल और बिहार तक इसकी जड़ें फैली हुई हैं। गिरफ्तार किए गए कई आरोपी पहले से ही चार्जशीटेड हैं। पुलिस का कहना है कि यह कोई साधारण अपराधी समूह नहीं, बल्कि बच्चों की चोरी और मानव तस्करी में माहिर एक प्रोफेशनल गैंग है, जिसकी कहानी अब धीरे-धीरे सामने आ रही है।