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सोमा मुंडा के हत्यारों की गिरफ्तारी नहीं होने पर 17 जनवरी को झारखंड बंद का ऐलान

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द फॉलोअप डेस्क
खूंटी सदर प्रखंड के हुटार स्थित जियारप्पा में सोमवार को एदेल संगा पड़हा राजा स्वर्गीय सोमा मुंडा की पुण्य स्मृति में विशाल श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया गया। सभा में हजारों की संख्या में ग्रामीणों, समाज के प्रतिनिधियों और विभिन्न संगठनों के नेताओं ने पहुंचकर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। पूर्व निर्धारित पड़हा मैदान में सुबह करीब 11 बजे से ही लोगों का जुटान शुरू हो गया था। कुछ ही देर में युवा, बुजुर्ग, महिलाएं और बच्चे बड़ी संख्या में एकत्र हो गए। पूरी तरह शांतिपूर्ण माहौल में आयोजित इस कार्यक्रम की शुरुआत पत्थलगढ़ी कर स्थापित स्मारक के पारंपरिक पूजन से की गई। इसके बाद स्व. सोमा मुंडा के चित्र पर उनके परिजनों सहित उपस्थित लोगों ने माल्यार्पण और पुष्पांजलि अर्पित की।


श्रद्धांजलि सभा में पड़हा समाज के विभिन्न क्षेत्रों से आए राजा और समाज के प्रमुख नेताओं ने अपने विचार व्यक्त किए। महादेव मुंडा, कमल सांगा, प्रेम सांगा, मंगल सिंह मुंडा, सनिका भेंगरा समेत अन्य पड़हा राजाओं ने स्व. सोमा मुंडा के साथ जुड़े संस्मरण साझा करते हुए उन्हें समाज के लिए प्रेरणास्रोत बताया। वक्ताओं ने कहा कि स्व. सोमा मुंडा निर्भीक, संघर्षशील और आदिवासी समाज के हक-अधिकारों के लिए सदैव अग्रिम पंक्ति में खड़े रहने वाले नेता थे। शिक्षा, रोजगार, जल, जंगल और जमीन की रक्षा के लिए उनका संघर्ष सदैव याद रखा जाएगा।


इस अवसर पर दो मिनट का मौन रखकर दिवंगत आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की गई। सभा में विभिन्न राजनीतिक दलों के प्रतिनिधि और आदिवासी समाज के गणमान्य लोग भी मौजूद रहे। झारखंड पार्टी के जिला महासचिव योगेश वर्मा, अबुआ झारखंड पार्टी के अध्यक्ष रिदन होरो, पौलूस नाग, मार्शल बारला सहित कई नेता कार्यक्रम में शामिल हुए। श्रद्धांजलि सभा के माध्यम से आदिवासी समन्वय समिति ने स्व. सोमा मुंडा की हत्या के आरोपियों की शीघ्र गिरफ्तारी की मांग को लेकर प्रशासन को कड़ा संदेश दिया। समिति ने बताया कि आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए प्रशासन को पहले ही 72 घंटे का अल्टीमेटम दिया गया था, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हो सकी है।


आदिवासी नेताओं ने चेतावनी दी कि यदि 16 जनवरी तक आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं होती है तो 17 जनवरी को पूरे झारखंड में बंद बुलाया जाएगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह बंद न्याय की मांग और प्रशासन की कथित उदासीनता के विरोध में होगा। साथ ही जनता से बंद को सफल बनाने की अपील की गई, इसे आदिवासी समाज की आवाज को मजबूती देने वाला आंदोलन बताया गया।