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गणतंत्र दिवस पर मोराबादी मैदान में मिनी झारखंड का दीदार, झांकियों के जरिए दिखाई दी राज्य की विकास गाथा

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द फॉलोअप डेस्क
​गणतंत्र दिवस के अवसर पर रांची के मोराबादी मैदान में आयोजित मुख्य समारोह में झारखंड की बदलती तस्वीर और सांस्कृतिक विरासत का अनूठा प्रदर्शन किया गया। परेड के बाद निकाली गई विभिन्न विभागों की झांकियों ने न केवल दर्शकों का मन मोहा, बल्कि राज्य सरकार की सफल योजनाओं और भविष्य के लक्ष्यों को भी जनता के सामने रखा।


​प्रमुख झांकियों की झलकियां
​स्वास्थ्य और सामाजिक कल्याण: स्वास्थ्य विभाग की झांकी में 'कुष्ठ मुक्त झारखंड' का संदेश दिया गया, जिसमें आयुष्मान आरोग्य मंदिर के मॉडल के जरिए ग्रामीण चिकित्सा सेवाओं को दिखाया गया।

वहीं, एक अन्य झांकी में 'बाल विवाह मुक्त झारखंड' का संकल्प दोहराया गया, जिसमें लड़कियों की शादी की उम्र 18 और लड़कों की 21 वर्ष होने का संदेश दिया गया।


नारी शक्ति और स्वावलंबन
ग्रामीण विकास विभाग (JSLPS) की झांकी सबसे आकर्षक रही। इसमें 'पलाश दीदी कैफे' और 'पलाश मार्ट' के जरिए दिखाया गया कि कैसे 33 लाख से अधिक ग्रामीण महिलाएं आत्मनिर्भर बन रही हैं। झांकी में महिलाओं के सशक्तिकरण को देवी के रूप में प्रदर्शित किया गया।


​कृषि और नवाचार
 'अंतर्राष्ट्रीय महिला किसान वर्ष 2026' की झांकी ने भविष्य की खेती की झलक दिखाई। इसमें कृषि कार्यों में 'ड्रोन दीदी' और सौर ऊर्जा (सोलर पैनल) के उपयोग को प्रदर्शित किया गया, जो झारखंड की कृषि में आ रहे आधुनिक बदलाव का प्रतीक है।


​शिक्षा और विज्ञान उच्च एवं तकनीकी शिक्षा विभाग की झांकी में 'जनजातीय मूल से वैज्ञानिक शिखरों तक' का सफर दिखाया गया। इसमें झारखंड सीएम फेलोशिप योजना और इसरो (ISRO) के साथ राज्य के जुड़ते कदमों को खूबसूरती से पेश किया गया।


​वन्यजीव और सड़क सुरक्षा
पर्यावरण विभाग की झांकी में हाथियों, बाघों और तितलियों के मॉडल्स के साथ राज्य की समृद्ध जैव विविधता को दिखाया गया। वहीं, परिवहन विभाग ने 'यातायात नियमों' के प्रति जागरूकता फैलाने के लिए एक विशाल 'स्टॉप' साइन और सड़क सुरक्षा प्रतीकों वाली झांकी निकाली।


​झारखंड के 25 वर्ष: राज्य स्थापना के रजत जयंती वर्ष (25 वर्ष) को समर्पित झांकी में बिरसा मुंडा की प्रतिमा और राज्य की औद्योगिक व सांस्कृतिक प्रगति का भव्य संगम देखने को मिला।


मोराबादी मैदान में निकली इन झांकियों ने यह साबित कर दिया कि झारखंड अपनी परंपराओं को सहेजते हुए आधुनिकता और विकास की ओर तेजी से कदम बढ़ा रहा है। मैदान में मौजूद हजारों लोगों ने तालियों की गड़गड़ाहट के साथ इन झांकियों का स्वागत किया।


कला और संस्कृति: सोहराय कला और सोहराय भवन की जीवंत झलक- झारखंड सरकार के सांस्कृतिक विभाग द्वारा प्रस्तुत इस झांकी में राज्य की विश्व प्रसिद्ध सोहराय और कोहबर कला का अद्भुत प्रदर्शन किया गया।


 पारंपरिक स्थापत्य: झांकी के मुख्य हिस्से में 'सोहराय भवन' के भव्य मॉडल को दिखाया गया है, जो झारखंड की पारंपरिक मिट्टी के घरों और उनकी दीवारों पर की जाने वाली चित्रकारी का प्रतीक है।


लोक कला का सम्मान: झांकी की दीवारों पर हिरण, पक्षी और प्रकृति के सुंदर चित्रण (सोहराय पेंटिंग) किए गए हैं, जो झारखंडी जीवन में प्रकृति के महत्व को बताते हैं।


सांस्कृतिक वैभव: झांकी के साथ पारंपरिक वेशभूषा में नृत्य करते कलाकारों ने मोराबादी मैदान के वातावरण को उत्सव के रंग में सराबोर कर दिया। यह झांकी संदेश देती है कि विकास के साथ-साथ झारखंड अपनी जड़ों और लोक कलाओं को संरक्षित करने में भी सबसे आगे है।
समारोह का समापन


इन सभी झांकियों के प्रदर्शन ने मोराबादी मैदान में मौजूद दर्शकों को झारखंड की एक ऐसी तस्वीर दिखाई जो शिक्षित, स्वस्थ, आत्मनिर्भर और अपनी संस्कृति पर गर्व करने वाली है। लोगों ने इन झांकियों की सराहना की, जो राज्य के विभिन्न विभागों के कठिन परिश्रम और दूरदर्शिता का परिणाम हैं।