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कुड़माली भाषा को आठवीं अनुसूची में शामिल करने का वादा पूरा करे केंद्र सरकार : शीतल ओहदार

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रांची 
आज रांची में बृहद झारखंड कुड़मी समन्वय समिति के बैनर तले कुड़मी समाज के विभिन्न मुद्दों को लेकर अति आवश्यक बैठक रखी गई, जिसकी अध्यक्षता समन्वय समिति के मुख्य संयोजक  शीतल ओहदार ने की। बैठक को संबोधित करते हुए  ओहदार ने कहा कि कुड़मी समाज विगत 75 वर्षों से कुड़मी जनजाति को अनुसूचित जनजाति की सूची में शामिल करने एवं कुड़माली भाषा को संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल करने की मांग लगातार करता आ रहा है। जब-जब केंद्र सरकार को आवश्यकता पड़ती है, तब-तब मांग पूरी करने का आश्वासन दिया जाता है और वोट लिया जाता है, किंतु बाद में सरकार मुकर जाती है। हाल ही में पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में गृह मंत्री अमित शाह जी द्वारा कुड़माली भाषा को पांच मई के बाद संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल करने का वादा किया गया था। इसी वादे के तहत संपूर्ण जंगल महल के कुड़मियों ने भाजपा को 40 विधायक देकर ऐतिहासिक विजय दिलाई और कुड़मियों के बदौलत आज पश्चिम बंगाल में सरकार बनी।

दो माह का समय दिया 
 ओहदार ने कहा कि केंद्र सरकार अपने वादे के मुताबिक कुड़माली भाषा को संविधान की आठवीं अनुसूची में अविलंब शामिल कर वादा पूरा करे। यदि केंद्र सरकार दो माह के अंदर कुड़माली भाषा को आठवीं अनुसूची में शामिल करने के लिए कैबिनेट में प्रस्ताव नहीं लाती है, तो संपूर्ण झारखंड, बंगाल और उड़ीसा में आर्थिक नाकेबंदी की जाएगी।  ओहदार ने जेएमएम, कांग्रेस और भाजपा पार्टी से आह्वान किया कि कुड़मियों की जनसंख्या प्रतिशत पूरे झारखंड प्रदेश में सभी जातियों से अधिक है, किंतु राज्यसभा में इस जाति का नेतृत्व करने वाला नगण्य है। इसीलिए इन तीनों पार्टियों से आग्रह होगा कि समाज से एक-एक व्यक्ति को राज्यसभा सांसद बनाया जाए। बैठक को राजेंद्र महतो, सखीचंद महतो, सुषमा महतो, सपन कुमार महतो, थानेश्वर महतो, दानिसिंह महतो, रामचंद्र महतो, ललित मोहन महतो, शशिरंजन महतो, हरिशंकर महतो, अघनु राम महतो, रामपोदो महतो, हेमलाल महतो, सरस्वती महतो आदि ने संबोधित किया।

भाषा बोलने वालों की प्रतिशत संख्या हर कीमत पर वास्तविक रहे
बैठक में सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि जातिगत जनगणना बहुत दबाव के बाद केंद्र सरकार करा रही है, जिसमें अपनी जाति की संख्या और कुड़माली भाषा बोलने वालों की प्रतिशत संख्या हर कीमत पर वास्तविक रहे। इस बार चूक हो गई तो संख्या का प्रतिशत घट जाएगा और कई लाभों से पूरा समाज वंचित हो जाएगा। जाति में कुड़मी और भाषा में कुड़माली दर्ज करने में कोई चूक न हो, इसके लिए प्रत्येक प्रखंड में सेमिनार किया जाएगा। इस कार्य हेतु प्रखंड प्रभारी नियुक्त किए गए तथा प्रखंडवार तिथि की घोषणा की गई। सर्वसम्मति से यह भी निर्णय लिया गया कि आंदोलन को और तेज करते हुए लोकसभा के आगामी मानसून सत्र में बृहद झारखंड कुड़मी समन्वय समिति के बैनर तले दिल्ली के जंतर-मंतर में जनजातीय कुड़मी संस्कृति, वाद्य यंत्र एवं पारंपरिक पोशाक के साथ धरना-प्रदर्शन किया जाएगा। यह भी निर्णय लिया गया कि वर्तमान में जातीय जनगणना के ग्राम नजरिया नक्शा में जाहेर थान, ग्राम थान जैसे पांचों थानों को चिह्नित कराया जाए। प्रत्येक कुड़मी गांव में आखड़ा (आखरा) को चिह्नित किया जाए, जिससे टुसु, करम जैसे परब और संस्कृति को संजोया जा सके। यह भी निर्णय लिया गया कि बंदना (सोहराई) परब में गोठईर टांड़ और बरद भिड़का (बरद खुंटा) टांड़ को भी संरक्षित किया जाए।

मौके पर ये लोग रहे मौजूद 
 ओहदार  ने संगठन का विस्तार करते हुए वरिष्ठ समाजसेवी रामपोदो महतो जी को केंद्रीय प्रधान कार्यकारी अध्यक्ष नियुक्त किया एवं नरेश कुड़मी महतो को रांची जिला सचिव की जिम्मेदारी दी। बैठक में मुख्य रूप से ओमप्रकाश महतो, राजकुमार महतो, रघुनाथ महतो, सोनालाल महतो, डब्लू महतो, मंगलदेव महतो, जितेंद्र महतो, प्रदीप महतो, फुलको महतो, बेबी महतो, अमृता महतो, लालो देवी, बुद्धदेव महतो, पति महतो, विष्णु महतो, ललिता देवी, रूबी देवी, शारदा देवी, रीता कुमारी, सोनिया देवी, धनेश्वरी देवी, बबीता देवी, किरण देवी, शीला देवी, ललिता कुमारी महतो सहित सैकड़ों लोग उपस्थित रहे।

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