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ट्रंप के खिलाफ वैश्विक विरोध की लहर, No Kings आंदोलन में युद्ध और सत्ता के खिलाफ सड़कों पर उतरा जनसैलाब

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द फॉलोअप डेस्क 

अमेरिका और यूरोप समेत दुनिया के कई हिस्सों में शनिवार को “नो किंग्स” नाम से अभूतपूर्व विरोध प्रदर्शन देखने को मिला, जहां लाखों लोगों ने सड़कों पर उतरकर पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की नीतियों और ईरान के साथ बढ़ते तनाव के खिलाफ जोरदार आवाज उठाई। यह आंदोलन वैश्विक स्तर पर लोकतंत्र और नागरिक अधिकारों की रक्षा का प्रतीक बन गया। इस पूरे आंदोलन का मुख्य केंद्र मिनेसोटा रहा, जहां सेंट पॉल स्थित कैपिटल परिसर में हजारों लोग एक साथ जुटे। यहां प्रसिद्ध गायक ब्रूस स्प्रिंगस्टीन ने अपनी प्रस्तुति दी और लोगों के हौसले को बढ़ाया। उन्होंने अपने गीत के माध्यम से हालिया घटनाओं पर दुख व्यक्त करते हुए कहा कि जनता की एकजुटता ही लोकतंत्र की असली ताकत है।


देशभर में फैला व्यापक जनआंदोलन
यह विरोध केवल बड़े शहरों तक सीमित नहीं रहा। न्यूयॉर्क सिटी जैसे महानगरों से लेकर ड्रिग्स जैसे छोटे कस्बों तक लोगों ने भागीदारी निभाई। आयोजकों के अनुसार, देश के सभी राज्यों में हजारों कार्यक्रम आयोजित किए गए और इस बार लाखों लोगों के शामिल होने का अनुमान जताया गया।
राजधानी क्षेत्र में प्रदर्शनकारियों ने लिंकन मेमोरियल से लेकर राष्ट्रीय मैदान तक मार्च किया और सत्ता के खिलाफ नारे लगाए। लोगों ने लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा की मांग की। अधिकांश प्रदर्शन शांतिपूर्ण रहे, लेकिन लॉस एंजेलिस में कुछ स्थानों पर स्थिति तनावपूर्ण हो गई। पुलिस के अनुसार, कुछ लोगों द्वारा पत्थर और बोतलें फेंके जाने के बाद आंसू गैस का इस्तेमाल करना पड़ा और कई लोगों को हिरासत में लिया गया।


वैश्विक स्तर पर गूंजा आंदोलन
यह आंदोलन केवल अमेरिका तक सीमित नहीं रहा। लंदन, पेरिस और रोम जैसे शहरों में भी बड़ी संख्या में लोग सड़कों पर उतरे। विभिन्न संगठनों और नागरिक समूहों ने इसमें भाग लेते हुए लोकतंत्र और अधिकारों के समर्थन में आवाज उठाई। कुल मिलाकर, यह आंदोलन केवल विरोध तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसने यह संदेश दिया कि दुनिया भर में लोग अपने अधिकारों और लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा के लिए एकजुट होकर खड़े हो सकते हैं।

 

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