द फॉलोअप डेेस्क
रांची के दो मूल्यांकन केंद्रों पर राजनीति विज्ञान की लगभग 29 हजार कॉपियों की जांच हो रही है, जिन्हें जांचने के लिए केवल 18 परीक्षक हैं। इनमें से तीन प्रधान परीक्षक हैं, जो कॉपियों की जांच नहीं करते हैं। इस प्रकार 29 हजार कॉपियों के लिए केवल 15 परीक्षक ही उत्तर पुस्तिकाओं का मूल्यांकन कर रहे हैं। एक परीक्षक एक दिन में लगभग 40 कॉपियों की जांच करता है। ऐसे में सभी कॉपियों के मूल्यांकन में लगभग एक महीना और लग सकता है। इसका मतलब यह है कि कॉपियों का मूल्यांकन कार्य अप्रैल के अंत तक ही पूरा हो पाएगा, जबकि अप्रैल महीने तक रिजल्ट जारी करने की बात कही गई है। पॉलिटिकल साइंस की 29 हजार कॉपियों में से अब तक लगभग सात हजार कॉपियों की ही जांच हुई है। इनमें मारवाड़ी प्लस टू विद्यालय में लगभग 16 हजार और संत अन्ना इंटर कॉलेज में लगभग 13 हजार कॉपियां हैं। समाजशास्त्र विषय की कॉपियों के मूल्यांकन के लिए भी आवश्यक संख्या में शिक्षक उपलब्ध नहीं हैं। इंटर स्तर पर इस विषय को पढ़ने वाले विद्यार्थियों की संख्या लगभग एक लाख है, लेकिन प्लस टू विद्यालयों में इस विषय के पर्याप्त शिक्षक नहीं हैं।
ऐसे में केवल इंटर कॉलेज के शिक्षक ही उत्तर पुस्तिकाओं का मूल्यांकन कर रहे हैं। इसका मुख्य कारण शिक्षकों की कमी है।