रांची
बोकारो और हजारीबाग में पुलिसकर्मियों के वेतन की अवैध निकासी मामले को गंभीरता से लेते हुए मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने सख्त रुख अपनाया है। उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिया है की जांच शुरुआत से की जाए और दोषी पाए जाने वाले अधिकारियों पर कड़ी कारवाई की जाए। इस मुद्दे को लेकर शुक्रवार को प्रोजेक्ट भवन में उच्चस्तरीय बैठक भी आयोजित की गई, जिसमें मुख्य सचिव अविनाश कुमार, वित्त सचिव ने प्रशांत कुमार ने और डीजीपी तदाशा मिश्रा समेत कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद थे। सभी जिलों के साथ-साथ पुलिस की तमाम ईकाइयों में 10 साल की वेतन की निकासी की जांच का आदेश दिया है।
हजारीबाग-बोकारो के बाद वेतन घोटाले की आंच पलामू तक पहुंची
हजारीबाग और बोकारो के बाद अब पलामू जिले में भी गड़बड़ी के संकेत मिले हैं। जांच के दौरान यह सामने आया है कि हजारीबाग में यह मामला वर्ष 2014 से चल रहा था। इस मामले में पुलिस अधिकारियों की भूमिका भी संदेह के घेरे में है। वर्तमान में हजारीबाग में डीएसपी अमित कुमार डीडीओ का चार्ज संभाल रहे हैं, जबकि बोकारो में डीएसपी अनिमेष गुप्ता यह जिम्मेदारी निभा रहे हैं। जांच में यह भी पाया गया है कि आमतौर पर डीएसपी को डीडीओ का चार्ज दिया जाता है, लेकिन हजारीबाग में बीच-बीच में एसपी भी इस जिम्मेदारी को संभाल चुके हैं। वहीं, पलामू ट्रेजरी में भी कुबेर पोर्टल के माध्यम से ज्यादा भुगतान किए जाने का मामला सामने आया है। यहां तीन से चार ऐसे मामलों की पहचान हुई है, जिनमें पुलिसकर्मियों को वेतन मद में अधिक भुगतान किए जाने की आशंका जताई जा रही है। मामले के उजागर होने के बाद विभागीय सचिव ने पलामू के डीसी से रिपोर्ट तलब की है।
सभी इकाइयों से मांगी गई विस्तृत रिपोर्ट
इसके बाद उनके आदेश पर डीआईजी बजट ने सभी जिलों के एसपी समेत तमाम पुलिस इकाइयों के प्रमुख को आदेश जारी किया और अवैध निकासी का दायरा बढ़ने के संकेत भी पुलिस मुख्यालय को मिले हैं, ऐसे में सभी जिलों से 10 सालों की वेतन निकासी की पूरी जांच कराकर रिपोर्ट मांगी गई है। आगे ऐसी अनियमितता न हो, इसके लिए सावधानी बरतने के निर्देश भी जारी किए गए हैं।
आरोपियों पर सख्त कार्रवाई और एसीबी जांच की तैयारी
इस केस में आरोपी पुलिसकर्मियों द्वारा पद के दुरुपयोग, आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने के मामले में शामिल आरोपियों के खिलाफ सख्त कारवाई की जाए। पुलिसकर्मियों पर पद के दुरुपयोग और आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने के आरोप में अलग से केस दर्ज किए जाएंगे। वहीं गिरफ्तार आरोपियों के बैंक खातों को सीज कर दिया गया है और जल्द ही पूरे मामले की जांच के लिए एसीबी (एंटी करप्शन ब्यूरो) से जांच की सिफारिश जल्द ही भेजी जाएगी।