भारत में प्रतिभा का अकाल पड़ने की एक बड़ी वजह यह है कि हमने देश की कम से कम 80 फीसदी आबादी के अन्दर पैदा होने वाली प्रतिभाओं को पनपने लायक सिस्टम नहीं तैयार किया है।
एक खूँखार शासक, तानाशाह, अय्याश और आतंकवादी- गद्दाफी का नाम सुनते सामान्य मस्तिष्क में सबसे पहले यही शब्द तो गूंजते हैं।
'उर्दू और हिंदी दोनों ठेठ भारतीय भाषा है। दोनों का उदय भी लगभग एक साथ ही हुआ। बाद में दोनों की राह अलग-अलग हो गई।
'कभी चंबल की बीहड़ों में दहशत रहीं फूलन देवी ने अस्सी के दशक में आत्मसमर्पण किया। जेल की सजा भी भुगती। बाद में सामाजिक सेवाओं में समय दिया। समाजवादी पार्टी कीसांसद भी बनीं।
'यह कहानी चिंदी नाम की उस लड़की की है, जिसका जनम 14 नवंबर 1948 को महाराष्ट्र के वर्धा में हुआ था।
जातीय अहंकार एक तरह की मानसिक बीमारी है। खासकर तब जब आपका जातीय इतिहास वर्चस्व और शोषण का रहा हो।
जिंदगी एक नई जंग है। संघर्ष की दास्तां है यह।
संघ के प्रभाव वाली नरेंद्र मोदी की सरकार ने जाति आधारित जनगणना कराने से इनकार कर दिया
हैदराबाद की मीनल सिंघवी की कहानी उनकी ही जुबानी
हिंदी के वरिष्ठ लेखक असगर वजाहत 2011 में फ़ैज़ अहमद फ़ैज़ के जन्म शताब्दी समारोह में शिरकत करने पाकिस्तान गए थे। वहां लगभग 45 दिन घूमते रहे।
सॉफ्टवेयर को बनानेवाली कंपनी एनएसओ ने दावा किया है कि वह अपना यह माल सिर्फ संप्रभु सरकारों को ही बेचती है ताकि वे आतंकवादी, हिंसक, अपराधी और अराजक तत्वों पर निगरानी रख सकें।