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Followup Special News

चायवाले इस बच्‍चे केेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेे हौसले जानकर आप हो जाएंगे हैरान

पिता रहे नहीं, लॉक डाउन में मां की नौकरी चली गई जानिये इस बच्‍चे की कहानी

महारानी के लेखक का सवाल: एक दलित, पिछड़ा, महिला को नायक के रूप में कब करेंगे स्वीकार

'याद आते हैं तुलसीदास, जिन्होंने कहा था- जाकी रही भावना जैसी, प्रभु मूरत देखी तिन तैसी।

अब तालिबान ने कॉमेडियन नज़र मोहम्मद को गला रेत कर मार डाला

दूसरी तरफ चीनी नेता तालिबानी नेता से मिल रहे हैं। अमेरिका नेता भारतीय नेता से।

यूपी में प्रियंका का प्रयास, भाजपा को हराने के लिए विपक्षी एकता के अलावा और कोई चारा नहीं 

भाजपा को हराने के लिए विपक्षी एकता के अलावा और कोई रास्ता नहीं है। 2024 लोकसभा का सेमी फाइनल 2022 के यूपी चुनाव को माना जा रहा है। रांकापा के शरद पवार, टीएमसी कीममताबनर्जीऔर प्रशांत किशोर समेत कई नेता 2024 में विपक्षी एकता पर बल दे रहे हैं। इधर, यूूूपी मे

वतन की राह... से लेकर पिया गए रंगून... तक वाले राजा मेहदी अली ख़ान को जानिये

'कम लोगों को मालूम है कि राजा मेहदी अली ख़ान एक बहुत ही शानदार शायर, गीतकार और लेखक के साथ साथ संगीतकार भी थे।

आज के राष्ट्रवाद से कितनी अलग थी रवींद्र नाथ टैगोर की देशभक्‍ति

'टैगोर एक मानवतावादी विचारक थे और गांधी एक धर्मपारायण।

दादा साहब फाल्के के नाम पर पुरस्कार के फिल्मी खेल को समझिये

''आपको सरकारी दादा साहब फाल्के पुरस्कार और मुंबइया दादा साहब फाल्के पुरस्कार के अंतर को समझना होगा।

प्लेग ने न्यूटन दिया कोरोना ने क्या?  जानिये आईज़ैक की कथा

'सेब न्यूटन के सिर पर ही गिरा कि नहीं यह तो इतिहास स्पष्ट नहीं करता।

आखिर पाकिस्‍तान को लेकर चीन का क्‍यों उमड़ता है इतना प्‍यार

उइगर मुसलमानों के साथ चीन की प्रताड़ना जग-जाहिर है। लेकिन क्‍या कभी पाकिस्‍तान में इसके खिलाफ विरोध के स्‍वर उठे।

'आप इंसाफ़ नहीं देंगे तो एक दिन पीड़ित आपसे छीन लेंगे न्याय'

भारत में प्रतिभा का अकाल पड़ने की एक बड़ी वजह यह है कि हमने देश की कम से कम 80 फीसदी आबादी के अन्दर पैदा होने वाली प्रतिभाओं को पनपने लायक सिस्टम नहीं तैयार किया है।

दख़ल: लीबिया के तानाशाह 'कर्नल गद्दाफ़ी' के काल की कुछ अलग कहानी

एक खूँखार शासक, तानाशाह, अय्याश और आतंकवादी- गद्दाफी का नाम सुनते सामान्‍य मस्तिष्क में सबसे पहले यही शब्द तो गूंजते हैं।

'उर्दू और हिंदी में फ़र्क़ सिर्फ़ है इतना, हम देखते हैं ख्‍़वाब वो देखते हैं सपना'

'उर्दू और हिंदी दोनों ठेठ भारतीय भाषा है। दोनों का उदय भी लगभग एक साथ ही हुआ। बाद में दोनों की राह अलग-अलग हो गई।

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