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साबरमती का संत-3 : महात्‍मा गांधी के किसी भी आंदोलन में विरोधियों के प्रति कटुता का भाव नहीं रहा

‘आने वाली नस्लें शायद मुश्किल से ही विश्वास करेंगी कि हाड़-मांस से बना हुआ कोई ऐसा व्यक्ति भी धरती पर चलता-फिरता था’

मेरे ये गीत याद रखना, कभी अलविदा ना कहना !

'अपने सार्वजनिक जीवन में बेहद चंचल, खिलंदड़े, शरारती और निजी जीवन में बहुत उदास,खंडित और तन्हा किशोर कुमार रूपहले परदे के सबसे रहस्यमय और सर्वाधिक विवादास्पद व्यक्तित्वों में एक रहे हैं।

साबरमती का संत-2 : ट्रस्टीशिप के विचार को बल दें, परिष्कृत करें, ठुकराएं नहीं 

' पूंजीवादी शक्तियां भी मार्क्सवाद और गांधीवाद के सिद्धांतों को समझती हैं।

पाकिस्‍तान यात्रा: आतंकवाद और धर्मान्धता की जड़ है- अज्ञानता और शोषण

जै़दी साहब के वालिद अलीगढ़ की बातें करते-करते रोने लगते

बहस आबादी-2: अगर ऐसा ही रहा तो देश को मुस्‍लिम राष्ट्र बनने से कोई रोक नहीं सकता!

जनसंख्या पर हो रही बहस के निहितार्थ पढ़िये बहस आबादी की समापन क़िस्त

बहस आबादी-1 : जनसंख्या वरदान है या अभिशाप, दुविधा से निकलना ही होगा

जनसंख्या पर हो रही बहस के निहितार्थ पहली किस्त

चाणक्य और मैकियावली के दर्पण में आज की भारतीय राजनीति की गति

''साम, दाम, दंड, भेद' से चीजों को पा लेना किस किस्म की संस्कृति को विकसित करेगी!

साबरमती का संत-1 : महात्मा गांधी के नामलेवा ही कर रहे रोज़ उनकी हत्या

'‘आने वाली नस्लें शायद मुश्किल से ही विश्वास करेंगी कि हाड़-मांस से बना हुआ कोई ऐसा व्यक्ति भी धरती पर चलता-फिरता था’

साइक्‍लॉजिस्‍ट की इस बात में है दम- सोच बदलिये, ज़िंदगी बदल जाएगी

'जिंदगी में हमेशा याद रखें की हम हर वह चीज पा सकते हैं जो किसी और ने पाई हो।

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