द फॉलोअप डेस्क:
बिहार (Bihar) के मोकामा (Mokama) टाल क्षेत्र के चर्चित दुलारचंद यादव हत्याकांड (Dularchand Yadav Murder) में तीन अलग-अलग प्राथमिकी दर्ज की गई थीं। खास बात यह है कि तीनों FIR में घटना को लेकर अलग-अलग आरोप और दावे सामने आए। अब सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) की ओर से मोकामा विधायक अनंत सिंह (Anant Singh) को 1 दिसंबर तक सरेंडर करने का निर्देश दिए जाने के बाद ये प्राथमिकी एक बार फिर चर्चा में हैं। इस मामले में पहली एफआईआर दुलारचंद यादव के पोते नीरज कुमार (Neeraj Kumar) के बयान पर दर्ज हुई थी। इसमें अनंत सिंह, उनके भतीजे राजवीर सिंह और कर्मवीर सिंह के अलावा छोटन सिंह और कंजम सिंह को नामजद किया गया था। नीरज कुमार के आवेदन के मुताबिक, चुनाव प्रचार के दौरान अनंत सिंह और दुलारचंद यादव के बीच विवाद हुआ था। आरोप है कि इसी दौरान अनंत सिंह के दोनों भतीजों ने गोली चलाई, जो दुलारचंद यादव के पैर में लगी। इसके बाद छोटन सिंह और कंजम सिंह ने थार गाड़ी से उन्हें कुचल दिया। इस प्राथमिकी में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 103 और 3(5) के साथ आर्म्स एक्ट की धारा 27 के तहत मामला दर्ज किया गया था।

दूसरी FIR में जन सुराज पक्ष पर आरोप
हत्याकांड में दूसरी प्राथमिकी अनंत सिंह के समर्थक जितेंद्र कुमार की ओर से दर्ज कराई गई थी। इसमें जन सुराज प्रत्याशी पीयूष प्रियदर्शी, लखन महतो, बाजो महतो, नीतीश महतो, ईश्वर महतो और अजय महतो समेत अन्य अज्ञात लोगों को आरोपित बनाया गया था। जितेंद्र कुमार की शिकायत में संबंधित लोगों पर हमला करने और हत्या की साजिश रचने के आरोप लगाए गए थे। इस मामले में भारतीय न्याय संहिता की धारा 126(2), 115(2), 109(1), 324(9), 352, 351(2) और 35 के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई थी। इस तरह पहली और दूसरी एफआईआर में घटना को लेकर दो अलग-अलग पक्षों की ओर से आरोप लगाए गए। वहीं, तीसरी प्राथमिकी पुलिस ने स्वतः संज्ञान लेते हुए दर्ज की थी। पुलिस ने घटना से जुड़े सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो और डॉक्टरों की पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट को आधार बनाया था। इन साक्ष्यों के जरिए घटना की परिस्थितियों और दुलारचंद यादव की मौत से जुड़े तथ्यों की जांच की गई। इस तीसरी प्राथमिकी ने भी मामले की जांच में अहम भूमिका निभाई।

पुलिस की जांच रिपोर्ट के बाद बढ़ी चर्चा
तीनों प्राथमिकी और उनसे जुड़े साक्ष्यों की जांच के बाद पुलिस कोर्ट में अपनी रिपोर्ट सौंप चुकी है। सूत्रों के मुताबिक, पटना पुलिस की जांच रिपोर्ट में अनंत सिंह और कुछ अन्य आरोपितों के खिलाफ लगाए गए आरोप सही पाए गए हैं। रिपोर्ट में एसडीपीओ और एसपी स्तर पर की गई जांच एवं पर्यवेक्षण का भी उल्लेख है। बताया गया है कि जनवरी 2026 में अनंत सिंह, मणिकांत ठाकुर और रंजीत राम के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल किया गया था। पुलिस की जांच रिपोर्ट के आधार पर दुलारचंद यादव के परिजनों ने 24 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट में जवाबी हलफनामा भी दाखिल किया था। इसके बाद मामले की सुनवाई के दौरान शीर्ष अदालत ने अनंत सिंह को 1 दिसंबर तक सरेंडर करने का निर्देश दिया। इस आदेश के बाद हत्याकांड की तीनों एफआईआर में दर्ज आरोपों और जांच के निष्कर्षों पर फिर से चर्चा शुरू हो गई है। हालांकि, प्राथमिकी में लगाए गए आरोपों और पुलिस की जांच में सामने आए तथ्यों को अंतिम न्यायिक निष्कर्ष से अलग समझना जरूरी है।