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यहां की जाती है नाग देवता की खास पूजा, जानिए! मंदिर से जुड़ी इस अद्भुत मान्यता के बारे में

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द फॉलोअप टीम, दुमका: 

दुमका जिला मुख्यालय से 30 किमी दूर जरमुंडी प्रखंड के सुखजोरा गांव में एक नाग मंदिर है। नागों की पूजा के लिए ये मंदिर पूरे प्रदेश में मशहूर है। यहां के स्थानीय सहित आसपास के लोग नागों को देवता मानते हैं और उसकी पूजा करते हैं। सुखजोरा गांव स्थित नाग मंदिर में प्रतिवर्ष हजारों की संख्या में श्रद्धालु विशेष पूजा-अर्चना करते हैं। 


नाग देवता को डलिया चढ़ाने की परंपरा
सुखजोरा स्थित नाग मंदिर में नाग देवता को डलिया चढ़ाने की परंपरा है। यहां पशुबलि की भी परंपरा है। यहां पूजा के असवर पर बकरों की बलि भी दी जाती है। यहां ना केवल नाग को देवता मानकर पूजा की जाती है बल्कि सर्पदंश के शिकार लोगों को भी यहां लाया जाता है। श्रद्धालुओं में ऐसी मान्यता है कि यहां नाग मंदिर का जल पिलाने से लोग ठीक हो जाते है। हालांकि इसका कोई वैज्ञानिक आधार नहीं है। स्थानीय लोगों का मानना है कि ये नाग मंदिर एतिहासिक है। इसका इतिहास लगभग 200 साल पुराना है। कहा जाता है कि यहां नाग देवता दर्शन भी देते हैं। 



स्थानीय लोगों में नागमणि की किवदंती
स्थानीय लोगों में ये किवंदती प्रचलित है कि पहले नाग मंदिर में नाग देवता की मूर्ति पर नागमणि जड़ित थी। बाद में किसी ने वो नागमणि चुरा ली। प्रतिवर्ष 22 जून से सात जुलाई तक सुखजोरा के नाग मंदिर में विशेष पूजा की जाती है। यहां सात जुलाई को प्रतिवर्ष मेला लगता है। नियमों के मुताबिक तो यहां मेले का आय़ोजन नहीं होना था लेकिन इसका पालन होता नहीं दिखा। लघु पैमाने पर ही सही लेकिन यहां मेले का आयोजन किया गया था। 



सुखजोरा मेले में कोविड नियमों का उल्लंघन
सुखजोरा में नाग मंदिर के पास लघु स्तर पर मेला लगा था। यहां खिलौने की दुकानें सजी थीं। श्रद्धालुओं के लिए फूल सहित पूजा सामग्री की दुकानें खुली थीं। जो भी श्रद्धालु यहां पूजा के लिए पहुंचा था उसके चेहरे पर मास्क नहीं दिखा। सोशल डिस्टेंसिंग का पालन भी यहां नहीं दिखा। तस्वीरों में साफ देखा जा सकता है कि लोग कोरोना वायरस के खतरे से बेखबर घूम रहे थे। स्वास्थ्य पर श्रद्धा को महत्व देना जोखिम भरा हो सकता है ये ध्यान रखना चाहिए।