द फॉलोअप टीम, दिल्ली:
नीति आयोग के उपाध्यक्ष राजीव कुमार ने सतत विकास लक्ष्य सूचकांक का तीसरा संस्करण जारी किया। इस सूचकांक में झारखंड और बिहार का प्रदर्शन काफी खराब रहा। असम ने भी खराब प्रदर्शन किया। सूची में झारखंड नीचे से दूसरे स्थान पर रहा। इसका आशय ये है कि झारखंड सूचकांक में दिए गए लक्ष्यों को ठीक ढंग से हासिल कर पाने में नाकामयाब रहा। बिहार और असम के साथ भी यही मुश्किल थी। सभी मामलों में केरल राज्य ने बाजी मार ली। चलिए जानते हैं पूरी बात।
सूचकांक में इन मापदंडों का होता है इस्तेमाल
मिली जानकारी के मुताबिक सतत विकास लक्ष्य सूचकांक में सामाजिक, आर्थिक और पर्यावरणीय मापदंडों के आधार पर राज्यों तथा केंद्र शासित प्रदेशों की विकास की गति का आकलन किया जाता है। इसमें स्वास्थ्य, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, पर्यावरणीय दशा तथा आर्थिक और सामाजिक विषमता में कमी लाने को शामिल किया जाता है। ये देखा जाता है कि इन तमाम आधारों को ध्य़ान में रखते हुए किस राज्य ने कितनी प्रगति की है। मतलब है कि राज्यों ने विकास तो किया लेकिन क्या ये तमाम तत्व उसमें शामिल थे। क्या बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिली। क्या नागरिकों को बेहतर स्वास्थ्य भी मिला। क्या विकास की गति में पर्यावरण का ध्यान रखा गया।
हिमाचल और केरल सबसे तेजी से विकसित राज्य
ताजा जारी सूचकांक के मुताबिक सबसे तेज गति से विकास करने वाले राज्य केरल, हिमाचल प्रदेश, तमिलनाडु, गोवा और कर्नाटक हैं। वहीं सबसे सुस्त रफ्तार से विकास पथ पर आगे बढ़ने वाले राज्यों में पहला नाम बिहार का है। इसके बाद झारखंड, असम, उत्तर प्रदेश और राजस्थान का स्थान आता है। इस बीच देश के स्तर पर सतत विकास लक्ष्य सूचकांक का स्कोर 2020-21 में छह अंकों का सुधार हुआ है। सूचकांक का अंक 60 से बढ़कर 66 हो गया है, जोकि अच्छी बात है।
नीति आयोग ने आधिकारिक बयान में क्या कहा
नीति आयोग ने अपने आधिकारिक बयान में कहा कि देश के कई राज्यों ने मुख्य रूप से स्वच्छ पेयजल, स्वच्छता, सस्ती और स्वच्छ उर्जा सहित शिक्षा की दिशा में अनुकरणीय प्रदर्शन किया है। इन सभी मामलों में सर्वाधिक 75 अंक के साथ केरल शीर्ष पर रहा। 74 अंक के साथ हिमाचल प्रदेश और तमिलनाडु संयुक्त रूप से दूसरे स्थान पर रहे। इस सूची में बिहार और झारखंड दो सबसे खराब प्रदर्शन करने वाले राज्य हैं। केंद्र शासित प्रदेशों में 79 अंक के साथ चंडीगढ़ शीर्ष पर रहा। 68 अंक के साथ दिल्ली दूसरे स्थान पर रहा। अपने पिछले प्रदर्शन में सुधार करने के मामले में मिजोरम, हरियणा और उत्तराखंड जैसे राज्य काफी आगे रहे। इनका प्रदर्शन अच्छा रहा।
स्वास्थ्य में गुजरात और शिक्षा में केरल रहा अव्वल
विषयवार बात की जाये तो स्वास्थ्य के क्षेत्र में सबसे उल्लेखनीय लक्ष्य हासिल करने वाला राज्य गुजरात बना। दिल्ली भी इस सूची में अव्वल रहा। गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के मामले में केरल और चंडीगढ़ ने बाजी मारी। गरीबी मिटाने के मामले में तमिलनाडु और दिल्ली ने उल्लेखनीय प्रदर्शन किया है। आर्थिक और सामाजिक विषमता को कम करने में मेघालय और चंडीगढ़ अव्वल आये।
दिसंबर 2018 में हुई थी इस सूचकांक की शुरुआत
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि सतत विकास लक्ष्य सूचकांक की शुरुआत दिसंबर 2018 में की गई थी। इसका पहला संस्करण 2018-19 में आया था। सतत विकास लक्ष्य सूचकांक के पहले संस्करण में 39 लक्ष्यों और 62 संकेतकों का इस्तेमाल किया गया था। तीसरे संस्करण में 17 ध्येय, 70 लक्ष्य और 115 संकेतकों का इस्तेमाल किया गया है। झारखंड और बिहार इसमें पिछड़ गये। शिक्षा, स्वास्थ्य और पर्यावरण अनुकूल विकास, सभी में इन राज्यों की स्थिति बुरी है।