द फॉलोअप डेस्क
साइबर क्राइम के गढ़ माने जाने वाले जामताड़ा जिले के कर्माटांड़ थाना क्षेत्र की शिकारपोषणी पंचायत स्थित सुघी पहाड़ी गांव से आदिवासी समाज ने इस अपराध के खिलाफ एक अनोखी मुहीम छेड़ी है। यहां के लोगों ने अपने दरवाजों और दीवारों पर पोस्टर लगाए हैं, जिन पर लिखा है: "मैं एक सीधा-साधा आदिवासी समाज का नागरिक हूं। मैं खुद भी साइबर अपराधियों के खिलाफ हूं और दूसरों को भी सुरक्षित रहने की सलाह देता हूं।" समाज द्वारा शुरू की गई यह पहल पूरे जिले में चर्चा का विषय बनी हुई है। इतना ही नहीं, हर रविवार को ग्रामीण 'माझी थान' में एकत्र होकर विशेष पूजा करते हैं। इस दौरान समाज को शिक्षित करने और साइबर अपराध से पूरी तरह दूर रहने का संकल्प लिया जाता है।

आबादी में 30% हिस्सेदारी, पर अपराध में शून्य संलिप्तता
वर्ष 2011 की जनगणना के अनुसार, जामताड़ा जिले में आदिवासी समाज की आबादी 2,40,489 है, जो कुल जनसंख्या का लगभग 30.40% हिस्सा है। राजनीतिक दृष्टिकोण से भी यह समाज लोकसभा और विधानसभा चुनावों में किसी भी जनप्रतिनिधि की हार-जीत का भविष्य तय करता है। शुरुआती दौर में आदिवासी समाज के मात्र चार लोगों के खिलाफ साइबर अपराध का मामला दर्ज हुआ था। लेकिन पिछले कुछ वर्षों के साइबर थाना रिकॉर्ड्स बताते हैं कि इस समाज का एक भी व्यक्ति साइबर क्राइम में संलिप्त नहीं पाया गया है। यह आंकड़ा साबित करता है कि अपनी ईमानदारी के लिए जाना जाने वाला यह समुदाय आज भी बिना किसी लालच के अपने पारंपरिक और ईमानदार तरीके से जीवन-यापन कर रहा है।
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आलीशान हवेलियों के बीच मिट्टी के घरों में ईमानदारी का बसेरा
जब द फॉलोअप ने रिपोर्टिंग के दौरान जब यह जानने की कोशिश की कि इस क्षेत्र के युवा और छात्र डिजिटल युग में मोबाइल का इस्तेमाल कैसे कर रहे हैं, तो बेहद सकारात्मक तस्वीर सामने आई। छात्र मोबाइल पर तेज टाइपिंग करते तो दिखते हैं, लेकिन उनका ध्यान केवल अपनी पढ़ाई, कोर्स और करियर से जुड़ी जानकारियों को खोजने पर होता है। खाली समय में युवा केवल संगीत सुनते हैं या अपनी आदिवासी संस्कृति से जुड़ी चीजों को सर्च करते हैं। साइबर ठगी से खड़ी की गई आलीशान इमारतों के बीच, इस क्षेत्र के आदिवासी परिवार आज भी अपने साधारण मिट्टी के मकानों में ईमानदारी की जिंदगी बसर कर रहे हैं।