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नई नियुक्ति नियमावली में संसोधन की मांग कर रहे विधायक अमित मंडल, इस बात से है असहमति

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द फॉलोअप टीम, रांची: 

गोड्डा से बीजेपी के विधायक अमित मंडल ने कहा कि नई नियुक्ति नियमावली में सामान्य वर्ग के अभ्यर्थियों को थर्ड औऱ फोर्थ वर्ग की नौकरी के लिए झारखंड राज्य से मैट्रिक और इंटरमीडिएट की शिक्षा होना अनिवार्य किया गया है जोकि भारतीय संविधान के अनुच्छेद-16 का उल्लंघन है। इससे रोजगार या किसी सार्वजनिक पद पर नियुक्ति के मामलों में सभी नागरिकों के लिए अवसर की समानता का प्रावधान किया गया है। नई नियमावली से इसका उल्लंघन होता है। 

गोड्डा में ऐसे विद्यालय नहीं हैं! 
गोड्डा जिले में एसपीटी एक्ट के कारण निजी मैट्रिक और इंटरमीडिएट के विद्यालय ना के बराबर हैं। यहां अनारक्षित औऱ आरक्षित वर्ग के विद्यार्थी बिहा ससे मैट्रिक और इंटरमीडिएट की डिग्री हासिल करते हैं। नई नियुक्ति नियमावली के मुताबिक अनारक्षित वर्ग के अभ्यर्थी जिन्होंने राज्य के बाहर से मैट्रिक और इंटरमीडिएट की डिग्री हासिल की है 1932 के खातियानी होने के बाद भी थर्ड और फोर्ढ वर्ग की नौकरी के लिए आवेदन नहीं कर पाएंगे। ऐसी परिस्थिति में यदि कोई अभ्यर्थी माननीय न्यायालय की शऱण में जाता है तो भविष्य में होने वाली नियुक्तियों में प्रश्न चिह्न लग जाता है। 

 

अंगिका को राजभाषा का दर्जा मिले
अमित मंडल ने कहा कि साथ ही अंगिका को बीजेपी की सरकार में द्वितीय राजभाषा का दर्ज मिला था लेकिन झारखंड राज्य कर्मचारी चयन आय़ोग द्वारा आयोजित की जाने वाली परीक्षाओं में क्षेत्रीय भाषाओं की सूची में अंगिता को सम्मिलित ना करना अंगिका भाषी युवा बेरोजगारों के प्रति सरकार की उदासीनता को दर्शाता है। ये युवाओं के साथ छल है। 

नई नियुक्ति नियमावली में संसोधन हो
यदि मानसून सत्र में नई नियुक्ति नियमावली में सरकार यथोचित संसोधन किए बगैर नियमावली पास करती है तो ये बेरोजगार युवाओं के भविष्य के साथ जानबूझ कर धोखा होगा। निवेदन है कि नई नियुक्त नियमावली में सरकार अपने चुनावी वादे के मुताबिक 1932 के खातियान को आधार मानकर नियमावली में संसोधन करते हुए क्षेत्रीय भाषा की सूची में अंगिका को सम्मिलित करे।