डेस्क:
विवादित और भड़काऊ बयानों के लिए अक्सर सुर्खियों में रहने वाले महंत यति नरसिंहानंद के सहयोगी यति सत्यदेवानंद सरस्वती ने भी रविवार को विवादित बयान दिया। सत्यदेवानंद सरस्वती ने कहा कि हिंदुओं को ज्यादा से ज्यादा बच्चे पैदा करने पर विचार करना चाहिए। उन्होंने कहा कि देश में बढ़ती मुस्लिम आबादी, हिंदुओं के पराभव का संकेत है। सत्यदेवानंद सरस्वती ने कहा कि हिंदुओं को ज्यादा बच्चे पैदा करके अपने परिवार, मानवता और सनातन धर्म की रक्षा सुनिश्चित करनी चाहिये।

3 दिवसीय धर्म संसद का आयोजन किया गया
दरअसल, इन दिनों हिमाचल प्रदेश के उना जिला अंतर्गत मुबारकनगर में तीन दिवसीय धर्म संसद का आयोजन किया गया है। देश भर के साधु-संत इस धर्म संसद में भाग ले रहे हैं। यहीं अपने संबोधन के दौरान सत्यदेवानंद सरस्वती ने कहा कि हमने अतीत में अमरनाथ यात्रा और बैष्णव देवी यात्रा के दौरान हिंदु श्रद्धालुओं पर मुस्लिम समाज के लोगों द्वारा पत्थरबाजी होते देखा है। उन्होंने कहा कि हालिया दुर्गाष्टमी तथा हनुमानजयंती के मौके पर देश के कई हिस्सों में ऐसा किया गया। उन्होंने कहा कि यदि हिंदू समाज नहीं जागा तो आने वाले समय में मुश्किलें बढ़ेंगी।
Increasing population of Muslims in the country indicates the decline of the Hindus...Hindus should strengthen their families,they should give birth to more children to protect their families,humanity& Sanatan Dharm:Yati Satyadevanand Saraswati at Una, Himachal Pradesh y'day pic.twitter.com/QQUt9uConT
— ANI (@ANI) April 18, 2022
रणनीति के तहत ज्यादा बच्चे पैदा करते हैं मुस्लिम!
उना धर्म संसद में शामिल होने पहुंचे विवादित महंत यति नरसिंहानंद ने दावा किया कि मुस्लिम समाज के लोग एक रणनीति के तहत ज्यादा बच्चों को जन्म दे रहे हैं ताकि आबादी बढ़ाकर,शासन तंत्र पर कब्जा किया जा सके। उन्होंने कहा कि यदि इस देश में कोई मुस्लिम प्रधानमंत्री बन गया तो 50 फीसदी हिंदुओं को धर्मांतरण करना पड़ जायेगा।

विवादित बयानों के लिए मशहूर हैं यति नरसिंहानंद
ये पहली बार नहीं है जब यति नरसिंहानंद या यति सत्यदेवानंद सरस्वती ने विवादित बयान दिया हो। दोनों ही अक्सर विवादित और भड़काऊ बयानों की वजह से सुर्खियों में रहते हैं। कई बार इन महंतों के बयान से कानून-व्यवस्था भंग होने की नौबत आ चुकी है। हालांकि, जिस प्रकार की कार्रवाई इनके खिलाफ होनी चाहिए थी, अभी तक ऐसा नहीं किया गया।