द फॉलोअप डेस्क:
कॉकरोच जनता पार्टी ने स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा का उनके आवास पर मुलाकात का ऑफर ठुकरा दिया है। पार्टी के प्रवक्ता सौरव दास ने कहा कि बुधवार को सुबह पुलिस ने हमें बताया कि स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा हमसे बात करना चाहते हैं। केंद्रीय मंत्री ने अपने आवास पर मुलाकात का प्रस्ताव दिया था, जिसे सीजेपी ने ठुकरा दिया है। सौरव दास ने साफ किया कि डेलिगेशन किसी के घर या ऑफिस में नहीं जाएगा। उन्होंने कहा कि यहां (जंतर-मंतर पर) जनता दरबार चल रहा है और यदि मंत्री बात करना चाहते हैं तो उन्हें लोगों के बीच में आना चाहिए। सौरव दास ने कहा कि बातचीत जंतर-मंतर पर होनी चाहिए। सीजेपी के प्रवक्ता ने कहा कि हम समझदार लोग हैं। यदि सरकार को धरनास्थल पर सरुक्षाकी चिंता है तो हम जंतर-मंतर पर किसी न्यूट्रल जगह पर मिलने को तैयार हैं।
VIDEO | Delhi: CJP Chief Spokesperson Saurav Das says, “This morning, the police reached out to us again and informed us that Union Minister JP Nadda wanted to speak with us. They invited us to his residence, but we categorically declined. We are not going to anyone's house or… pic.twitter.com/eOyfDYvRjO
— Press Trust of India (@PTI_News) July 22, 2026
सरकार की नीयत मांगें मानने की होनी चाहिए!
कॉकरोच जनता पार्टी के प्रवक्ता ने कहा कि सरकार की नीयत हमारी मांगें मानने की होनी चाहिए। बेकार की बातचीत के लिए हमें बुलाने का कोई मतलब नहीं है। हमारा समय कीमती है। सौरव दास ने कहा कि हजारों लोग अभी भी विरोध प्रदर्शन में शामिल हैं और हमें उन्हें भी संभालना है। सौरव दास ने कहा कि सरकार को यह साफ करना चाहिए कि, क्या वह सच में हमसे बातचीत करना चाहती है।

20 जुलाई को मंत्री से मिला था सीजेपी डेलिगेशन
गौरतलब है कि इससे पहले 20 जुलाई को सीजेपी के डेलिगेशन ने स्वास्थ्य मंत्री से मुलाकात की थी और उन्हें लिखित ज्ञापन सौंपा था। सीजेपी ने सरकार के सामने तीन मांगें रखी थीं, जिनमें पहली और प्रमुख मांग थी सोनम वांगचुक की रिहाई और उन्हें वीडियो संदेश जारी करने की अनुमति। दूसरी मांग थी शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा और तीसरी मांग थी नीट पेपर लीक के बाद जान गंवाने वाले बच्चों को परिजनों को 1-1 करोड़ रुपये का मुआवजा। हालांकि, प्रदर्शनकारी छात्रों ने संसद मार्च के दौरान पुलिस की बर्बरता के बीच सीजेपी डेलिगेशन की स्वास्थ्य मंत्री से मुलाकात पर नाराजगी जताई थी। छात्रों का ऐसा मानना है कि उनकी जीत तब होगी, जब सरकार धरनास्थल पर आकर उनसे बातचीत करेगी।