दिल्ली:
देशद्रोह कानून को लेकर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला आया है। सुप्रीम कोर्ट ने देश में देशद्रोह कानून पर सुनवाई पूरी होने तक रोक लगा दी है। सुप्रीम कोर्ट ने राज्यों और केंद्र से आग्रह किया है कि आईपीसी की धारा 124 ए के तहत कोई भी भी प्राथमिकी दर्ज ना की जाये।
केंद्र सरकार कानून पर पुनर्विचार करेगी
साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को आईपीसी की धारा 124ए के प्रावधानों पर पुनर्विचार करने की अनुमति दी है। गौरतलब है कि भारत में देशद्रोह अपराध है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि जब तक इस पर पुनर्विचार नहीं हो जाता। इसकी समीक्षा नहीं कर ली जाती, तब तक 124ए के तहत कोई भी मामला दर्ज नहीं किया जायेगा। गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट में धारा 124ए की संवैधानिक वैधता को चुनौती दी गई है। चीफ सजस्टिस एनवी रमणा, जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस हिमा कोहली की बेंच इस पर सुनवाई कर रही है।
Sedition Law | Supreme Court allows the Central government to re-examine and reconsider the provisions of Section 124A of the IPC which criminalises the offence of sedition. Supreme Court says till the exercise of re-examination is complete, no case will be registered under 124A. pic.twitter.com/xrjHNyLbA6
— ANI (@ANI) May 11, 2022
सरकार ने पहले कोर्ट में किया था बचाव
अब तक सुप्रीम कोर्ट में सरकार राजद्रोह कानून का बचाव कर रही थी। सरकार ने पहले हलफनामा दायर कर कहा थाकि इस कानून पर पुनर्विचार करने की जरूरत नहीं है। इतना ही नहीं। सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने भी ये कहा था कि 1962 में संविधान के फैसले के मुताबिक इस कानून के दुरुपयोग को रोकने के उपाय किए जा सकते हैं।

क्या है आईपीसी की धारा 124ए!
दरअसल, भारतीय दंड सहिंता की धारा 124ए में राजद्रोह या देशद्रोह का उल्लेख किया गया है। ये धारा कहती है कि अगर कोई व्यक्ति बोलकर या लिखकर या इशारों में या चिह्नों के जरिये किसी भी तरीके से घृणा, अवमानना या उत्तेजना फैलाने की कोशिश करता है तो वो राजद्रोह का आरोपी है। ये गैर जमानती अपराध है। इसमें दोषी पाए जाने पर 3 साल की कैद से लेकर आजीवन कारावास की सजा तक का प्रावधान है। जुर्माना भी लगाया जा सकता है।