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पेंशन में देरी करने वाले अफसरों पर गिरेगी गाज, दोषी पाये जाने पर 5,000 रुपये तक का जुर्माना 

पेंशन में देरी करने वाले अफसरों पर गिरेगी गाज, दोषी पाये जाने पर 5,000 रुपये तक का जुर्माना 

द फॉलोअप डेस्क 

असम में अब पेंशन में देरी करने वाले अफसरों पर कार्रवाई होगी और दोषी पाये जाने पर 5,000 रुपये तक का जुर्माना लगेगा। असम सरकार ने रिटायर सरकारी कर्मचारियों को समय पर पेंशन देने के लिए एक सख्त जवाबदेही व्यवस्था शुरू की है। इसमें उन अधिकारियों पर आर्थिक जुर्माना लगाने का भी प्रावधान है, जो पेंशन की प्रक्रिया में देरी करते पाए जाएंगे। यह कदम प्रशासनिक सुधार, प्रशिक्षण, पेंशन और लोक शिकायत विभाग द्वारा जारी एक नए नोटिफिकेशन के बाद उठाया गया है। इस नोटिफिकेशन में गलती करने वाले अधिकारियों से आर्थिक वसूली अनिवार्य की गई है, और डिजिटल प्लेटफॉर्म के ज़रिए लंबित पेंशन मामलों की निगरानी को मज़बूत बनाया गया है। मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने मंगलवार को कहा कि इस नई व्यवस्था का मकसद उन रिटायर सरकारी कर्मचारियों को सम्मान और गरिमा देना है, जिन्होंने राज्य के विकास में अहम योगदान दिया है।

रिटायर कर्मचारियों ने असम की प्रगति में योगदान दिया है

सरमा ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में कहा, "हमारे रिटायर कर्मचारियों ने असम की प्रगति में बहुत योगदान दिया है। उन्हें समय पर पेंशन मिलना उनका अधिकार है। इसे सुनिश्चित करने के लिए, हम एक जवाबदेही व्यवस्था लागू कर रहे हैं, जिसमें देरी के लिए ज़िम्मेदार लोगों पर जुर्माना भी लगाया जाएगा। हमारे पेंशनभोगी सम्मान और गरिमा के हकदार हैं।" नोटिफिकेशन के अनुसार, "उन कार्यालय प्रमुखों (HOOs) पर जुर्माना लगाया जाएगा, जिनके यहां पेंशन मामलों में तय SOPs (मानक संचालन प्रक्रिया) और समय-सीमा का उल्लंघन करते हुए बेवजह देरी पाई जाएगी।"

पोर्टल के ज़रिए देरी वाले पेंशन मामलों की एक सूची तैयार की जाएगी

विभाग ने आगे बताया कि हर महीने 'कृतज्ञता' पोर्टल के ज़रिए देरी वाले पेंशन मामलों की एक सूची तैयार की जाएगी। इस सूची को कार्यालय प्रमुखों, ज़िला आयुक्तों और विभाग के वरिष्ठतम सचिवों के बीच समीक्षा और कार्रवाई के लिए भेजा जाएगा।नोटिफिकेशन में कहा गया है कि नए प्रावधानों के तहत, "पेंशन प्रक्रिया के हर चरण में देरी के लिए ज़िम्मेदार अधिकारियों से 250 रुपये प्रति दिन की दर से आर्थिक वसूली की जाएगी। यह वसूली अधिकतम 5,000 रुपये तक हो सकती है।" सरकार ने यह भी निर्देश दिया है कि वसूली की राशि संबंधित अधिकारियों के वेतन बिलों से सीधे 'FinAssam' पोर्टल के ज़रिए काटी जाए, और अगले महीने के वेतन विवरण में इसे दर्शाया जाए।


 

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