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उत्तराखंड : चंपावत के जंगलों में आग को लेकर NGT गंभीर, सरकार को दिया जरूरी निर्देश

चंपावत के जंगलों में आग को लेकर NGT गंभीर, सरकार को दिया जरूरी निर्देश

देहरादून: 

एनजीटी ने उत्तराखंड सरकार को चंपावत के जंगलो में लगी आग पर लोगों के पुनर्वास और जंगलो के प्रभावित क्षेत्रों में पूर्व की स्थिति बनाने के निर्देश दिए हैं। मीडिया रिपोर्ट्स का हवाला देते हुए राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण के अध्यक्ष  न्यायाधीश आदर्श कुमार गोयल ने कहा कि मौज़ूदा हालत को देखते हुए वन विभाग उत्तराखंड के सचिव को निर्देश देना उचित समझते हैं। 


मीडिया रिपोर्ट्स से मिली जानकारी पर वे ध्यान दें। आग से प्रभावित क्षेत्र में लोगों के पुनर्वास के साथ जंगल के प्रभावित क्षेत्र में हरित आवरण को बहाल करने की कार्रवाई की जाए। 

 

चंपा फण्ड का उपयोग किया जाए
राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण ने कहा कि लोगों के पुर्नवास और पर्यावरण को हुए नुकसान की भरपाई के लिए राज्य के चंपा फंड का उपयोग किया जाए। प्राधिकरण ने कहा कि ऐसे आग को रोकने के लिए पहले से मानक तरीके मौजूद हैं। जिसके अंतर्गत जागरूकता, निगरानी और आग को रोकने का पूर्वाभ्यास  शामिल है। आग से आसपास के इलाकों में जैव-विविधता और पर्यावरण को हुए नुकसान की भरपाई के लिए कार्रवाई की जरूरत हैं। 

झारखंड में भी वन में लगी थी आग
आग से  झारखंड में भी काफी नुकसान हुआ। जंगल और पहाड़ में धधकती आग को कई दिनों तक देखा गया है। इस वजह से पलामू टाइगर रिज़र्व लातेहार में बाघों की गिनती का काम भी रोका गया है।  

क्यों लगती है जंगलो में आग 
जंगल में आग लगने के कई कारण होते हैं। जिनमे से कुछ प्राकृतिक तो कुछ मानवजनित गतिविधियों के अंतर्गत आती हैं। भारत में जंगलों में आग ज्यादातर मार्च -अप्रैल में लगती है। जब जमीन पर सूखी घास ,पत्ते और लकड़ियां होती हैं। इस मौसम में ग्रामीण महुआ के फूलो को चुनने के लिए के लिए सूखे पत्तो में आग लगा देते हैं। कई बार पत्थरों के इस सूखे मौसम में टकराने से भी आग की घटनाये देखने को मिलती हैं।